25% पाकर आरक्षण वाले डीएम बने और 80% पाकर जनरल लोग चपरासी, यह नहीं चलना चाहिए

0
17

संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण की व्यवस्था पर चर्चा करने की वकालत की है। बिल्कुल चर्चा होनी चाहिए , धारा 370 की तरह आरक्षण भी संविधान में 10 वर्ष के लिए की गयी एक अल्पकालिक व्यवस्था थी। जैसे मोदी सरकार ने संगीन की नोक पर धारा 370 हटाया वैसे ही जातिगत आरक्षण भी हटा दे तो उचित होगा।

दलितों और उनकी नेता मायावती ने जैसे धारा 370 हटाने के लिए मोदी सरकार का समर्थन किया , वैसे ही आरक्षण हटाने पर भी सरकार का समर्थन करना चाहिए , नहीं करेंगी तो ईडी , आईटी , सीबीआई है ही।

दरअसल आरक्षण का लाभ पाकर दलित और अन्य जातियाँ बहुत मोटे हो गये हैं और आरक्षण से नौकरी और प्रमोशन पाकर बड़े बड़े पदों पर पहुँच गये फिर भी वंचित और शोषित का टैग लगा कर वह और उनके बच्चे सरकारी आरक्षण पा रहे हैं।

ऐसे लोग अगड़ी जातियों से अधिक सांप्रदायिक और धार्मिक होते हैं , यह माथे पर टीका और भगवा पहन लेने को ही अपने जीवन की उपलब्धि मानते हैं , काँवड़ यात्राओं में इसीलिए इनकी भरमार होती है। आपको उसमें एक भी अगड़ी जाति के लोग नहीं मिलेंगे।

मेरा मोहन भागवत को पूरा समर्थन है। आरक्षण की जातिगत व्यवस्था पूरी तरह समाप्त होना चाहिए और इसकी जगह वित्तीय आधार पर न्यूनतम आमदनी की रेखा के नीचे रहने वालों को लाभ मिलना चाहिए।

वह भी नौकरी और प्रमोशन में आरक्षण नहीं बल्कि उनकी पढ़ाई , लिखाई और अन्य खर्चों को छात्रवृत्ति देकर उनको प्रतियोगिता में उच्च स्थान प्राप्त करने का समान अवसर देना चाहिए।

प्रतियोगिता और प्रमोशन में जो योग्य हो वही चयनित हो , 25% पाकर यह डीएम बने और 80% पाकर अन्य लोग चपरासी , यह नहीं चलना चाहिए आरक्षण का आज लाभ ले रहे लोग भी 80% लाएँ और आईएएस बनें।

ये लेख स्वतंत्र टीकाकार मोहम्मद जाहिद के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।