राजनीति

ये न्यू इंडिया वाले बिहार का बहाव है, रुकिए मत, सवाल पूछिए मत, बस मजे लीजिए … 

उत्तरी-पूर्वी बिहार भीषण बाढ़ से हुई तबाही से जूझ रहा है, वहीं दक्षिणी बिहार सूखाड़ के दंश से उबरने के जतन में जुटा है.. हवाई दौरों, समीक्षा बैठकों, राहत कार्यों के मुआयनों और चंद मुआवजों की औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं.. जमीनी हकीकत भयावह है, फिर भी सरकारी स्तर से हमेशा की तरह सब कुछ चाक – चौबंद बताया जा रहा है .. सूबे की सरकार की चिंता अपने गठबंधन की खुलती गाँठ को लेकर है , कराहता – सिसकता बिहार दरकिनार है..

40 में से 39 सीटों वाले बहुमत के गुमशुदा जनप्रतिनिधियों की खोज उनके क्षेत्रों में जारी है, विपक्ष के विरोध का कोरम पूरा करने की कवायद विधानमंडल के सदनों और विधानसभा परिसर में पूरी हो चुकी है, नौकरशाही लूट के सबब बन चुके बाढ़ – सुखाड़ का लुत्फ उठा रहा है, कभी किसी कोने से बिहार को केंद्र की सरकार के द्वारा विशेष सहायता दिए जाने की मांग उठती सुनाई तो देती है लेकिन वो भी बौराई मीडिया के मोदी- नीतीश गान के जबर्दस्त शोर में दब – दबा जाती है…

एक सांसद के परिवार के बच्चे के साथ खेलते प्रधानमंत्री की तस्वीरें को , ‘देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में’ के कैप्शन के साथ , देश की सबसे बड़ी खबर के तौर पर दिखाया व् परोसा जाता है , लेकिन बिहार की बाढ़ में बह गए बिशेसर- मधेसर- कमेसर – खिरोधर के बच्चों के अस्तित्व को ही नकारा जाता है..

नदियों के ऊफान में बहना और बूँद – बूँद की आस में सूखना बिहार की नियति है और छलावी – मायावी विकास की उफनाती धारा में मजे से गोते लगाना बेशर्म व्यवस्था की मौज .. ये न्यू इंडिया व् बदलते- बढ़ते बिहार का बहाव है, रुकिए मत, सवाल पूछिए मत, बस मजे लीजिए … 

ये लेख स्वतंत्र विचारक आलोक कुमार के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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