देश

जैसे ही पीएम का टेपरिकार्डर शुरू होता है, मैं “भाभी जी घर..” देखना बंद कर देता हूं

देश साल 1947 में आजाद हुआ। साल 2017 में आजादी के 70 साल पूरे हुए। देश के अब तक के सबसे महान प्रधानमंत्री जैसे ही भाषण देना शुरू करते हैं कि पिछले 70 सालों में इस देश में कुछ नही हुआ। किसानो को तबाह किया गया। उनका वोटबैंक की तरह इस्तेमाल किया गया, देश को लूटा…कश्मीर को बर्बाद कर दिया….आदि आदि…..जैसे ही पीएम सोनी कंपनी का टेपरिकार्डर दबाकर ये बात दोहराना शुरू करते हैं, मैं “भाभी जी घर पर हैं”, देखना बंद कर देता हूं। मैं आजकल टीवी का इस्तेमाल सिर्फ दो कामों के लिए करता हूं। या तो भाभी जी घर पर हैं देखने के लिए या फिर प्रधानमंत्री मोदी का भाषण सुनने के लिए। दोनो की रेंज एक ही है। दोनो की ही स्क्रिप्ट बहुत कसी हुई है और डायरेक्शन एकदम परफेक्ट।

अब मुद्दे पर लौटते हैं। साल 2017 में देश की आजादी के 70 साल पूरे हुए। मोदी जी की सरकार मई 2014 में आ गई। सो 70 सालों में 3 साल तो खुद उनकी ही सरकार के जुड़ गए जिसमें देश में कुछ नही हुआ। उसे जमकर लूटा गया। प्रधानमंत्री के भाषण का कोई ओर-छोर नही है। उन्होंने कुछ और किया हो या न किया हो मगर पिछले पांच सालों मे भाषण बहुत दिलचस्प दिए हैं। खैर, फिर लौटते हैं 70 सालों पर। 16 मई 1996 से लेकर 1 जून 1996 तक अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री रहे। वे मार्च 1998 में फिर लौटे और इसके बाद अक्टूबर 1999 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। 70 सालों के अंधकार में ये साल उनके भी शामिल हैं। मगर वे इसके बाद भी लौटे और मई 2004 तक देश के प्रधानमंत्री बने रहे। यानि कि 6 साल से उपर उन्होंने देश की सत्ता संभाली। अब हम तो मोदी साहब की थ्योरी के आधार पर ही आगे चलेंगे। उनकी थ्योरी इस देश में 70 साल के गहन अंधकार की बात करती है। इस गहन अंधकार में वाजपेयी जी के 6 साल भी शामिल हो गए।

पर बात यहां भी खत्म नही होती है।  वाजपेयी जी तो मार्च 1977 में ही देश के विदेश मंत्री बन गए थे। अब कोई कांग्रेस की सरकार तो उन्हें विदेश मंत्री बनाती नही। ये जनता पार्टी की सरकार थी जिसे उस समय की भारतीय जनता पार्टी जिसे भारतीय जनसंघ के नाम से जानते थे, का भीतर और बाहर दोनो ही तरफ से पूरा समर्थन था। समर्थन ही नही बल्कि तब की बीजेपी उस सरकार में शामिल भी थी। जी हां, उस समय की भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सरकार में शामिल थी। वाजपेयी जी, आडवाणी जी, जार्ज साहब सबके सब मंत्री थे। आज की भाजपा के सहयोगी भी उसमें शामिल थे जैसे आज मोदी जी अपनी सरकार 41 सहयोगियों के दम पर चला रहे हैं। 1977 की सरकार में प्रकाश सिंह बादल साहब भी शामिल थे। सुरजीत सिंह बरनाला और बीजू पटनायक भी। करीब ढ़ाई साल तक ये सरकार चली। इस देश के 70 सालों के गहन अंधकार में ये काल भी शामिल हो गया। 1989 में वीपी सिंह आ गए, पीएम बनकर। उस वक्त भाजपा के पास 86 सांसद थे। 86 सांसदों वाली भाजपा ने उनका दौड़कर समर्थन किया। करीब एक साल ये भी चला। उन्ही 70 सालों के अंधेरे में।

अब इस सबके बाद मोदी जी सत्ता में आए। मई 2014। पूरे पांच साल से उनका भाषण सुनकर यही लगा कि जैसे वो यही बताने के लिए सत्ता में आए थे कि बीते 70 सालों में इस देश में कितना अंधेरा रहा। 5 साल से वो यही बताए जा रहे हैं। शायद देश की जनता ने उन्हें इसीलिए चुना था। इस बीच में-

राम मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। बस मोदी जी रिमोट ढूंढ रहे हैं, उसका उद्घाटन करने के लिए। रिमोट मिल नही रहा है। कांग्रेसियों ने छिपा दिया है शायद।

कश्मीर से धारा 370 हट चुकी है। बस महबूबा मुफ्ती का लिहाज करते हुए मोदी जी इस बात की घोषणा नही कर पा रहे हैं। आखिर महबूबा के साथ तीन साल से ऊपर सरकार चलाई है, 370 हटने का पब्लिकली ऐलान कर उन्हें दुखी कैसे कर सकते हैं?सारे कश्मीरी पंडित घाटी में वापिस लौट चुके हैं। बस हमारे चश्मे का पॉवर कमजोर है इसलिए हमें दिख नही रहे हैं।

पाकिस्तान को उसकी औकात बताई जा चुकी है, उसकी बदनाम आईएसआई जब सीना तानकर हमारे पठानकोट एयरबेस पर जांच-पड़ताल करने आई थी, तो उसने ये बात लिखकर दे दी थी। वो कागज भी मोदी जी के पास रखा है। अगली चुनावी रैली में वो इसे दिखा भी देंगे।

ट्रिपल तलाक कानून पास हो चुका है। राज्य सभा में जो लटका हुआ है वो लोकतंत्र का कोई चमगादड़ है। उसे जब चाहेंगे उड़ा देंगे।सिटीजनशिप बिल भी पास हो चुका है। राज्यसभा में जो लटका हुआ है वो उसका प्रेत है, जब चाहेंगे झाड़ फूंककर उडा़ देंगे उसे।

अभी जिस समय मैं ये पोस्ट लिख रहा हूं, पुलवामा में एक मेजर और तीन जवान शहीद हो चुके हैं। उधर राजौरी में बारूदी सुरंग हटाने में शहीद मेजर चित्रेश का शव उनके घर देहरादून पहुंच चुका है। टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज के तौर पर ये खबर चल रही है और नीचे की पट्टी में पीएम मोदी का बयान चल रहा है कि जो आग आपके  दिल में, वही मेरे दिल में है….. हमने सेना को पूरी छूट दी है….।

एक भारतीय के तौर पर मेरा खून खौल रहा है। मैं पूरे होशो-हवास में ऐसे प्रधानमंत्री को खारिज करता हूं जो देश को भाषण बोलने की मशीन समझता हो।

ये लेख वरिष्ठ टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है

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