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स्टिंग में ब्लैकमनी कबूले जो सांसद, उनको बीजेपी ने यूपी की इस सीट से दिया टिकट

2019 लोकसभा चुनाव में कैंडिडेट के लिए कैंपेन पर खर्च की अधिकतम लिमिट 70 लाख तय की गई है. चुनाव आयोग की इस गाइडलाइन का उम्मीदवार कितना पालन करते हैं? ये जानने के लिए न्यूज चैनल टीवी9भारतवर्ष ने ‘ऑपरेशन भारतवर्ष’ नाम से 18 सांसदों समेत कुल 21 नेताओं का स्टिंग किया था. इस स्टिंग में यूं तो कई सांसद बेनकाब हुए, लेकिन एक नाम ऐसा रहा, जो स्टिंग के वक्त सपा में था, लेकिन अगले दिन उसने बीजेपी की सदस्यता ले ली. अब इस सांसद को भाजपा से टिकट भी मिल गया है. इस सांसद का नाम है- प्रवीण कुमार निषाद.

प्रवीण निषाद को बीजेपी ने संत कबीर नगर से टिकट दिया है. यूपी की हॉट सीट गोरखपुर के सांसद संतोष उर्फ़ प्रवीण निषाद मार्च 2018 में उपचुनाव लड़कर सांसद बने थे. वो निषाद दल के मुखिया संजय निषाद के बेटे हैं. बीजेपी के इन उम्मीदवार से अंडरकवर रिपोर्टर्स  ये बोलकर मिले थे कि वो पॉलिटिकल फंड देने वाली कंपनियों से जुड़े हैं. लिहाज़ा उन्हें चुनाव में करोड़ों रुपये ब्लैकमनी मिल सकता है.

ये सुनते ही तब समाजवादी पार्टी के सांसद प्रवीण निषाद ने खुलकर बताया था कि 2018 के उपचुनाव में कैसे उन्होंने दोनों हाथों से करोड़ों का कालधन लुटाया था? उन्होंने ये ख़ुलासा भी किया कि इस बार भी लोकसभा चुनाव में करोड़ों का ब्लैकमनी दोनों हाथों से लुटाएंगे.

अंडरकवर रिपोर्टर ने पैसा फंड फंड कराने के बदले में प्रोटेक्शन की मांग की. इस पर प्रवीण निषाद ने कहा कि काम हो जाएगा,बताइये आप ज़मीन किधर देख रहे हैं, अगर उसमें कोई हमारी मदद चाहिए तो कितनी? इस पर अंडरकवर रिपोर्टर ने कहा करीब 10 एकड़ ज़मीन चाहिए. प्रवीण निषाद ने कहा हम पूरी प्रोटेक्शन देंगे बस कोई गलत काम मत करिएगा.

पिछले चुनाव में हुए खर्च के बारे में पूछे जाने पर प्रवीण निषाद ने बताया कि 7-8 करोड़ खर्च हो गए थे. जिसमें लगभग 3.50 करोड़ हमने खर्च किया और 4 करोड़ के आसपास पार्टी ने किया था. फंडिंग के सवाल पर निषाद ने कहा कि जितनी फंडिंग आप करा सकते हैं उतनी करा दीजिए, जिसपर निषाद ने कहा कि जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके उतनी करा दीजिए क्योंकि हमारे पास 2 लोकसभा सीट हैं. एक गोरखपुर और दूसरी पिताजी की महाराजगंज सीट.

स्टिंग में सांसद जी बोले थे कि ये खर्चा वो रैलियों में गाड़ी करवाते हैं तो तकरीबन 60-80 लाख रुपये खर्च होते हैं. इसके अलावा नौजवानों को टी-शर्ट, महिलाओं को साड़ियां भी बांटी जाती हैं. नोटबंदी के बाद कैश मैनेज करने के लिए प्रवीण निषाद ने बताया कि इसके लिए पार्टी का अकाउंट होता है. इसके अलावा थर्ड पार्टी का अकाउंट भी होता है और ट्रस्ट से भी मैनेज किया जाता है. पैसा देने की बात पर निषाद ने कहा कि हमें कैश दीजिए अगर चेक से जाएगा तो वो तो ऑन रिकॉर्ड होगा, कैश रहेगा तो कोई रिकॉर्ड नहीं रहेगा.

 

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