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सियासी दांव : CM योगी हुए शिवपाल पर मेहरबान, दे डाला अब तक का सबसे बड़ा गिफ्ट

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लखनऊ। चुनावी महाभारत के आगाज़ के बाद हर दिन कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है. सपा परिवार में चाचा भतीजे की कलह अभी तक शांत नहीं हुई  और बढ़ता ही जा रही है  इस बीच एक खबर से सपा परिवार में एक बार भी भूचाल आ गया है.  कभी सपा के कद्दावर नेता रहे और समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के संरक्षक शिवपाल को भाजपा सरकार की तरफ से तोहफा मिला है। लगातार सपा पर एक के बाद एक जवाबी हमला करना और विरोध करना शिवपाल के लिए फायदे की चीज साबित हुई है। शिवपाल यादव को मायावती का लखनऊ स्थित पूर्व कार्यालय 9 एलबीएस बंगला अलॉट किया गया है।

अब से मायावती के बंगले में सेक्युलर मोर्चा के संरक्षक शिवपाल यादव रहेंगे। मायावती का बंगला शिवपाल को शुक्रवार को आवंटित कर दिया गया है। इसके बाद उन्होंने बंगले का निरीक्षण किया। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करने के आदेश दिए थे। इस आदेश के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में अच्छा खासा घमासान मच गया था।

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बता दें बसपा सुप्रीमो ने अपना आशियाना बचाने के लिए एड़ी से लेकर चोटी तक का जोर लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद मायावती की मंशा शायद बंगला छोड़ने की नहीं थी, इसलिए उन्होंने बंगले का नाम बदलकर कांशीराम विश्रामालय का बोर्ड लगा दिया था। ये बोर्ड माया का बंगला बचाने के लिए खेला गया दांव था।

माया ने बंगले को बचाने के लिए बाहर श्री कांशीराम जी यादगार विश्रामालय स्थल नाम का बोर्ड लगा दिया था। मायावती ने बंगला बचाने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ से बात की थी। यहां तक कि उनका बंगला किसी को न दिया जाए इसलिए मायावती ने उस बंगले को कांशीराम विश्राम स्थल का बोर्ड लगा कर भी दांव खेला था, लेकिन उनकी एक न चली। आखिरकार उन्हें बंगला खाली करना पड़ा गया था।

योगी सरकार ने किया था विचार

योगी सरकार ने मायावती के सरकारी बंगले को कांशीराम मेमोरियल बनाने पर विचार किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मायावती ने सरकारी आवास को खाली करते हुए मांग की थी कि योगी सरकार इसे बीएसपी के संस्थापक कांशीराम का स्मारक घोषित करे।

इससे पहले मायावती ने सीएम योगी आदित्यनाथ को एक विरोध-पत्र भेजते हुए अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए कैबिनेट के फैसले और सरकारी आदेशों की जानकारी दी थी। इसमें कांशीराम मेमोरियल पर लिया गया निर्णय भी शामिल था। मायावती ने इस पत्र में कांशीराम के स्मारक की देखरेख के लिए अपनी पार्टी काडर को तैनात करने का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन फिर बाद में सरकार ने अपना इरादा बदल दिया था।

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