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चाणक्य का चुनावी मंत्र : पुरानों को करो किनारे, देश को दिखाओ नए चेहरे

मिशन 2019 फतह करने के लिए भाजपा सोच-समझ कर सभी सीटों पर प्रत्याशी उतरने की रणनीति अख्तियार की है. इसके तहत कई सीटों पर मौजूदा सांसदों की जगह किसी और को भी आजमाने की तैयारी है तो कहीं नेताओं की सीटों में फेरबदल की योजना बन रही है। कहीं ऐंटी-इन्कम्बैंसी से निपटने के लिए उम्मीदवार बदले जा रहे हैं तो कहीं जातीय समीकरण साधने की तैयारी है। यही नहीं इसके जरिए पार्टियां कई बागियों को भी निपटाने की तैयारी में हैं।

बिहार की 40 सीटों में से बीजेपी और जेडीयू के 17-17 सीटों पर लड़ने की बात कही जा रही है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने 30 सीटों पर चुनाव लड़ा था, ऐसे में अब उसे 13 सीटें छोड़नी होंगी। इसके चलते उसके पास नेताओं के बीच सामंजस्य की चुनौती है कि किसे उतारा जाए और किसे नहीं। इस बीच चर्चा है कि केंद्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह का नवादा से टिकट कट सकता है। वजह यह है कि यह सीट जेडीयू के कोटे में सकती है। कहा जा रहा है कि उन्हें बेगूसराय से टिकट मिल सकता है, जो सामाजिक समीकरणों के लिहाज से उनके मुफीद नहीं दिखती। यहां भूमिहार वोट नवादा की तुलना में कम है। ऐसे में सीट बदलने से गिरिराज सिंह की नाराजगी की भी चर्चाएं हैं।

इस बीच मथुरा से सांसद हेमा मालिनी की भी सीट बदलने के कयास लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्हें फतेहपुर सीकरी सीट से उतारा जा सकता है। सीकरी से सांसद बाबूलाल चौधरी के कामकाज से पार्टी नाखुश बताई जा रही है। हालांकि हेमा मालिनी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मथुरा के अलावा कहीं और से चुनाव नहीं लड़ेंगी।

एनसीआर की अहम सीटों में से एक नोएडा में बीजेपी उम्मीदवार बदलने की तैयारी में दिख रही है। सूत्रों के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में पार्टी के प्रति नाराजगी को थामने के लिए राजनाथ सिंह को लखनऊ की बजाय नोएडा से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। गौतमबुद्ध नगर सीट पर 12 लाख ग्रामीण वोटर हैं, जबकि 7 लाख शहरी मतदाता हैं। ग्रामीण अंचल में राजपूत समाज की अच्छी खासी संख्या होने के चलते राजनाथ को उतारकर बीजेपी डैमेज कंट्रोल करना चाहती है।

गौतमबुद्ध नगर से मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा को अलवर सीट से लड़ने के लिए भेजा जा सकता है। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले शर्मा के प्रति संसदीय क्षेत्र में लोग बहुत खुश नहीं देख रहे। कहा जा रहा है कि पार्टी ने आंतरिक सर्वे में रिपोर्ट बहुत अच्छी न रहने के बाद उन्हें नोएडा सीट से हटाने का फैसला लिया है।

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सीट रही फूलपुर लोकसभा से कांग्रेस कार्यकर्ता प्रियंका गांधी को लड़ाने की मांग कर रहे हैं। बीते 41 सालों से यह सीट कांग्रेस के खाते में नहीं है, लेकिन नेहरू और फिर उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित को लोकसभा भेजने वाली इस प्रतिष्ठित सीट से यदि प्रियंका उतरती हैं तो निश्चित तौर पर कांग्रेस के लिए समीकरण बदल सकते हैं।

उन्नाव सीट से बीजेपी के सांसद और बड़बोले नेता कहे जाने वाले साक्षी महाराज के टिकट को लेकर पार्टी ने अभी कुछ नहीं कहा है, लेकिन अंदरखाने इस बात की चर्चा है कि उनका टिकट काटा जा सकता है। यहां तक कि उन्होंने खुद प्रदेश बीजेपी आलाकमान को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि यदि इस सीट से कोई और उम्मीदवार उतारा जाता है तो पार्टी हार भी सकती है। वह खुद लोध समुदाय से आते हैं और उन्नाव सीट पर पिछड़े वर्ग की अच्छी खासी आबादी है। उन्होंने अपने पत्र में सीट पर आबादी के समीकरण को भी समझाने की कोशिश की है।

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