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बड़ा मंगल विशेष : ये आसान उपाय बना देंगे आपको मालामाल, बजरंगबली जी की होगी कृपा

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भगवान शिव के 11 अवतारों मे से एक है हनुमानजी का अवतार है। माना जाता है कि श्री राम भक्त हनुमान जी ऐसे देवता हैं जो थोड़ी सी प्रार्थना और पूजा से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।  इस बार जेठ का पहला बड़ा मंगल आज 21 मई है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि 19 मई से जेठ शुरू हो गया है और 21 मई को ज्येष्ठ मास की कृष्ण तृतीया से बड़े मंगल की शुरूआत हो गयी है।  ज्योतिषाचार्य के अनुसार आपको बताते चले  आज चन्द्रमा धनु राशि में रहेगा, जो मंगल की मित्र राशि है। बृहस्पति देव गुरु हैं, जो धर्म की रक्षा करते है। इससे सर्वत्र कल्याण होता है। सिद्ध योग होने  से हर कार्य में सफलता मिलेगी। ज्येष्ठ के बड़े मंगल की शुरूआत काफी शुभ व सफलतादायक रहेगी।

28 मई, 4 व 11 जून को भी बड़ा मंगल
ज्योतिषाचार्य के अनुसार दूसरा बड़ा मंगल 28 मई को पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में पड़ेगा। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी गुरू है जिसका खास प्रभाव रहेगा। जबकि तीसरा बड़ा मंगल चार जून को शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के साथ मृगशिरा रहेगा. मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल है, जो सबका मंगल करता है। जोकि एक शुभ संकेत है। ऐसे ही चौथा मंगल 11 जून में उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के साथ कर्क राशि रहेगी। इस दिन सिद्ध योग भी रहेगा। इस बार ज्येष्ठ के चारों मंगल शुभ योग में पड़ रहे है।

कैसे करे हनुमानजी का पूजन 

साधारणतया हनुमान प्रतिमा को चोला चढ़ाते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को पूजा करने का विशेष विधान होता है। इस दिन जिस भी भक्त द्वारा पूजा की जाती है उस पर इनकी कृपा बनी रहती है। चोले में चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर प्रतिमा पर लेपन कर अच्‍छी तरह मलकर, रगड़कर चांदी या सोने का वर्क चढ़ाते हैं। यह जरूरी नहीं की चोला मंगलवार और शनिवार के अलावा नहीं चढ़ा सकते है। बल्कि किसी भी दिन चोला चढ्या जा सकता है पर इस दिन चढ़ाना विशेष होता है।

पूजा करने की विधि :

1. सबसे पहले चोला चढ़ाने मे शुद्ध वस्त्रो को धारण किया जाता है।
2. सृष्टि क्रम और संहार क्रम मे पूजा करने के अपने ही लाभ है। सृष्टि क्रम यानि पेरो का क्रम जिससे देवता सोम्य रहते है, और संहार क्रम मे चोला चढ़ने से उग्र हो जाते है।
3. यदि कोई विशेष कामना पूर्ति हो तो पहले संहार क्रम से, जब तक कि कामना पूर्ण न हो जाए, पश्चात सृष्टि क्रम से चोला चढ़ाया जा सकता है। ध्यान रहे,यह पुरा काम अच्छे से सम्पन्न हो।
4. सात्विक जीवन, मानसिक एवं शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।

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