सड़क पर फसल फेंकने वाले आलू किसानों की ऐसे मदद करेंगे योगी

यूपी का किसान भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीति से बेहद नाराज है. क्योंकि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है. पिछले दिनों आलू का उचित दाम न मिलने की वजह से यूपी के किसान विरोध जताते हुए लाखों टन आलू मुख्यमंत्री आवास, विधानसभा और राजभवन के बाहर फेंक दिया था. किसानों का कहना है कि हमारे आलुओं का हमें उचित दाम नहीं मिल रहा है, जिसकी वजह से किसान अपने आलुओं को सडकों पर फेंक रहे हैं.

योगी सरकार का फरमान

इसी क्रम में योगी सरकार ने आलू को राजनीतिक मुद्दा न बनने के लिये मंगलवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया. यह समिति 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंपेगी. समिति के गठन का निर्णय योगी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में किया गया. बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि गठित समिति सुझाएगी कि आलू किसानों को कैसे सरकार की ओर से राहत दी जा सकती है.

गांवों के लिए खास प्रस्ताव को मिली मंजूरी

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इसके अलावा कैबिनेट में मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना के प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है, यह योजना मुख्य रूप से उन गांव के लोगों के लिए है जोकि अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे हुए हैं, राज्य की सीमा से जुड़े हुए हैं या फिर जहां वंतंगिया, मुसहर और थारू आदिवासी अधिक हैं.  फिक्स वैट और शिक्षकों को 5 साल की छुट्टी को मंजूरी सरकार ने नेचुरल गैस पर वैट को 5 फीसदी फिक्स करने के प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है. साथ ही सरकार ने गोरखपुर में बंद हो गई पिपराइच सुगर मिल को फिर से गैर विवादित जमीन पर शुरू करने की इजाजत दे दी है, वहीं बस्ती में भी मुंडेरवा सुगर मिल को भी खोलने की इजाजत दे दी गई है. इन तमाम प्रस्ताव के अलावा सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है, जिसमे शिक्षकों को पांच साल तक की स्पेशल छुट्टी को हरी झंडी दे दी गई है.

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