जरा हट के

बच्‍ची को बचाने के लिए पुलिसवाले ने लगा दी जान की बाजी, लेकिन सच सामने आया तो उड़ गए होश

फिल्‍मों में देखा होगा कि फिल्‍म का हीरो अपनी जान की बाजी लगा कर वो दूसरों की मदद करते हैं ऐसा ही माजरा हाल में देखने को मिला। हम बात कर रहे यूएस के न्यू हैम्पशायर की जहां एक गजब का वाकया देखने को मिला। दरअसल माजरा सुनने में बड़ा ही अजीब है लेकिन ये उतना ही सच है। एक दिन ड्यूटी पर लगे कुछ पुलिसवालों को एक कार के अन्दर से नवजात बच्चे की रोने की आवाज़ सुनाई दी जिसके बादर उन्‍होंने गाड़ी के आसपास देखा लेकिन वहां कोई भी मौजूद नहीं था।

उन्‍होने गाड़ी के अन्दर भी देखा तो उस बच्‍ची के अलावा और कोई भी नहीं था। पुलिसवाले समझ नहीं पा रहे थे कि कैसे उसे चुप कराए तभी उन्होंने गाड़ी का शीशा तोड़ दिया और बच्ची को बाहर निकाला लेकिन जैसे ही पुलिस वालों ने उस बच्ची को निकाला और अपने हाथ में लिया उनके होश उड़ गए। दरअसल हुआ ये कि जैसे ही पुलिसवालों ने उस बच्‍ची को गाड़ी से बाहर निकाला वैसे ही उन्‍हें ये पता चल गया कि वो कोई बच्‍ची नहीं बल्कि एक डॉल है।

इस बारे में उस पुलिसवाले ने बताया कि हमें एक पार्किंग में कार खड़ी दिखाई दी जिसमें से एक बच्‍चे की रोने की आवाज सुनाई दे रही थी वहीं उन्‍होंने ये भी बताया कि वो बच्‍चा कंबल में लपेटा हुआ था लेकिन उसके आसपास कोई भी नहीं था। बच्चे को गाड़ी में अकेला रोता हुआ देख उन्‍होंने उसे गाड़ी से बाहर निकाला। साथ में ये भी बताया कि जब हमने बच्चे को बाहर निकाला तो वो कुछ भी हरकत नहीं कर रहा था तभी हमने अपनी उंगली भी बच्चे की मुंह में डाली ये देखने के लिए कि बच्चा जिंदा तो है लेकिन उसने कोई रिएक्शन नहीं दिया।

जिसके बाद उन्‍हें समझ आ गया कि वो इंसानी बच्‍चा नहीं है बल्कि डॉल है। बता दें कि ये डॉल कैरोलिन सिएफर्ड नामक महिला की थी उसने बताया कि उसके पास इस तरह के 40 डॉल हैं। जिसके हर डॉल की कीमत एक लाख रुपए ($2,000) से ज्यादा हैं। कैरोलिन अपने बेटे के मरने के बाद इन डॉल के साथ रहना शुरू कर दिया और अब आलम ये है कि कैरोलिन जहां भी जाती हैं अपने साथ उन डॉल को लेकर जाती हैं। इस घटना के बाद कैरोलिन ने साफ तौर पर अपनी कार पर एक स्टीकर लगा दिया है जिसमें लिखा है कि यह कोई असली बच्चा नहीं है बल्कि डॉल है कृपया मेरी गाड़ी का शीशा न तोड़ें।

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