यूपी में चीटिंग रोकने पर बोले अखिलेश- मैंने भी की है नकल, देखें वीडियो

इस मामले में अपने पिता के नक्शे कदम पर चले अखिलेश यादव

नकलची तो सभी होते हैं. सभी अपने बचपन में थोड़ी बहुत नकल कर लेते हैं.

पूर्व सीएम अखिलेश ने कहा नकलची तो सभी होते हैं. सभी अपने बचपन में थोड़ी बहुत नकल कर लेते हैं. इसमें कोई बुराई नहीं है. जिस प्रदेश का मुखिया खुद नकल की पैरवी करने लगेगा, वहां उसके बच्चों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसे तो कोई मुख्यमंत्री से ही पूछे.

यहां यह जान लेना भी रोचक होगा कि उनके पिता मुलायम सिंह को उत्तर प्रदेश में नकल की कुव्यवस्था के पालक के रूप में ही देखा जाता है. दरअसल मुलायम सिंह यादव 1991 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. उनके इस शासनकाल को सिर्फ रामभूमि आंदोलन में रामभक्तों पर गोली चलवाने के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि उनका शासन यूपी की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए भी जाना जाता है.

मुलायम ने युवा वोटरों को लुभाने के लिए परीक्षाओं में ‘सेल्फ सेंटर’ की व्यवस्था लागू कर दी थी.

उस समय मुलायम सिंह ने कथित तौर पर युवा वोटरों को लुभाने के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं में ‘सेल्फ सेंटर’ की व्यवस्था लागू कर दी थी. इसके पहले एक स्कूल के बच्चे को अपनी परीक्षा देने के लिए किसी अन्य स्कूल पर जाना होता था. माना जाता था कि इससे अपरिचित माहौल में बच्चे नकल करने से डरेंगे और फेल होने के डर से अच्छी पढ़ाई करेंगे. लेकिन जब मुलायम सिंह ने ‘सेल्फ सेंटर’ यानी बच्चा जिस स्कूल में पढ़ाई कर रहा है, वह वहीं परीक्षा देगा, की व्यवस्था लागू करवा दी, तब परीक्षाओं में खूब जमकर नकल हुई.

परीक्षा में थोड़ा बहुत पूछ लेना नकल नहीं, मैंने भी ऐसा किया है: अखिलेश यादव

परीक्षा बोर्ड का परीक्षा परिणाम रिकॉर्ड तोड़ सबसे ऊपर आया.

प्रदेश में यूपी माध्यमिक परीक्षा बोर्ड का परीक्षा परिणाम रिकॉर्ड तोड़ सबसे ऊपर आया. बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल सामने आये जिनके यहां एक भी विद्यार्थी फेल ही नहीं हुआ. मुलायम सरकार का तर्क था कि सेल्फ सेंटर से बच्चों पर कोई दबाव नहीं रहेगा और उनके प्रदर्शन में सुधार होगा. जबकि असलियत यह हुई कि अध्यापकों, अभिभावकों और बच्चों ने खूब जमकर नकल की. बेहतर परीक्षा परिणाम के बाद भी इसे शिक्षा को कमजोर होने के रूप में देखा गया जिसके खिलाफ मुलायम सरकार की जमकर आलोचना हुई.

फिर साल 1992 का  आया. तब तक यूपी में भाजपा की सरकार बन चुकी थी. कल्याण सिंह सरकार अपने सख्त प्रशासन के लिए जानी जाती थी. कल्याण सरकार ने परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए ‘नकल अध्यादेश’ लायी. इसके तहत कोई भी परीक्षार्थी, अभिभावक या अध्यापक अगर नकल कराते हुए पकड़ा जाता तो उसे सीधा जेल हो सकती थी. सेल्फ सेंटर की व्यवस्था को भी रद्द कर दिया गया इस बदले माहौल में परीक्षा ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ परीक्षा परिणाम को पूरी तरह पलट कर रख दिया. 1992 के साल में यूपी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का परिणाम ऐतिहासिक रूप से नीचे आया. मुलायम सरकार के नकल कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगी. हजारों ऐसे स्कूल सामने आये जहां पर एक भी विद्यार्थी दसवीं, बारहवीं की परीक्षा पास नहीं कर सका. प्रदेश के इतने बुरे परिणाम के बावजूद आज तक कल्याण सिंह सरकार को कड़ी शिक्षा व्यवस्था के लिए आज भी याद किया जाता है.

कल प्रधानमंत्री ने एक रैली में जब यह कहा कि गोंद में नकल कराने के लिए परीक्षा सेंटर भी ठेके पर दिए जाते हैं, तो इससे हैरानी सिर्फ उन्हीं लोगों को हुई जो इस माहौल से परिचित नहीं हैं. यूपी में इस कुव्यवस्था को हर मां-बाप जानता है. उसे किसी स्कूल में बच्चों को पास करवाने के लिए पैसे लेने का काला उद्योग चल रहा है. दुर्भाग्य की बात यह है कि प्रधानमंत्री की इस साफ बात को भी अखिलेश यादव ने गम्भीरता से नहीं लिया. उलटे उन्होंने इसे एक मजाक एक तौर पर लेते हुए कहा कि थोड़ी बहुत नकल तो सभी करते हैं.

इससे एक बार फिर प्रदेश के बच्चों की शिक्षा को पलीता लग्न तय माना जा सकता है. ऐसे माहौल में पास हुए किसी बच्चे को बाद में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यह सब जानते हुए भी युवा वोटरों के वोट की लालच में सपा सरकार अपने उसी रवैये पर कायम है. और दूसरी तरफ भाजपा अपनी सरकार बनने पर शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने की बात कह रही है. अब यूपी का मतदाता अपने लिए किस व्यवस्था को तरजीह देता है ये तो 11 मार्च को ही साफ हो पायेगा जब नेताओं के परीक्षा परिणाम आएंगे

ओपन बुक परीक्षा लागू कराए बीजेपी’
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वीकार किया कि उनके शासन में बोर्ड परीक्षाओं में नकल होती थी. उन्होंने कहा कि अगर योगी सरकार वास्तव में छात्रों के हित में नकल रोकना चाहती है तो यूरोपीय देशों की तर्ज पर ओपन बुक परीक्षा लागू करे. स्कूलों में पढ़ाई के ऐसे इंतजाम करे कि छात्रों को नकल करने की जरूरत ही न पड़े. उचित पढ़ाई का इंतजाम किए बिना नकल रोकना अच्छा फैसला नहीं है मालूम हो कि इस बार 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 11 लाख 27 हजार छात्रों ने परीक्षा नहीं दी. इस बार पिछले साल की अपेक्षा नकलची कम संख्या में पकड़े गए, वहीं पहले दिन से परीक्षा छोड़ने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह अंतिम दिन जारी रहा है। अब बोर्ड प्रशासन का जोर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पर है। यह कार्य 17 मार्च से एक साथ प्रदेश भर में शुरू हो रहा है। अंतिम दिन 3306 छात्रों ने परीक्षा छोड़ी. हाईस्कूल में छह लाख 31 हजार 61 सहित कुल 11 लाख 27 हजार 815 परीक्षार्थी किनारा किया है. 11146 छात्र नकल करते पकड़े गए, जिसमें से 136 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया.

मुलायम ने रेप को लेकर दिया था विवादित बयान
2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान समाजवादी पार्टी के संस्थापक और अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव ने रेप को लेकर विवादित बयान दिया था. रेप करने वालों को लेकर मुलायम ने कहा था, ‘लड़कों से गलतियां हो जाया करती हैं, उन्हें कठिन सजा देने की क्या जरूरत है.’