भागवत ने लिंचिंग की बताई जो परिभाषा, उस पर सबसे तगड़ी बात बोले ओवैसी

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विजयादशमी पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लिंचिंग पर जो बयान दिया है, वो सुनकर एआईएमआईएम अध्यक्ष असुद्दीन ओवैसी भड़क गए हैं. उन्होंने कहा कि आरएसएस चीफ लींचिंग की पर रोक लगाने की बात नहीं कह रहे हैं, बल्कि वो ये कह रहे हैं कि इसे लिंचिंग न कहा जाए. उन्होंने एक खास खबर ट्वीट करके भागवत से पूछा है कि मॉब लिंचिंग करने वालों को फूल मालाएं किसने पहनाईं थी?

दरअसल बीते दिनों केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने तबरेज अंसारी की लिंचिंग के आरोपियों का माला पहनाकर स्वागत किया था. उसी का जिक्र करते हुए ओवौसी ने ट्वीट कर कहा ‘पीड़ित भारतीय थे, तो दोषियों को किसने माला पहनाई? तिरंगे में शव को किसने लपेटा? बीजेपी के तो एक सांसद गोडसे से प्यार करते हैं. जिस विचाराधारा ने महात्मा गांधी और तबरेज अंसारी जैसे लोगों की हत्या की उस विचारधारा से भारत की ज्यादा बदनामी हो रही है. भागवत लिंचिंग पर रोक की बात नहीं कह रहे हैं, वो कह रहे हैं इसे लिंचिंग न कहा जाए.’

इसके अलावा ओवेसी ने महाराष्ट्र के बीड में एक चुनावी जनसभा में आरोप लगाया कि 2014 के बाद से भारत में मॉब लिंचिंग की घटना बढ़ रही है, वह भी जानबूझकर की गई मानसिकता के साथ. उन्होंने कहा कि अगर मोहन भागवत कहते हैं कि मॉब लिंचिंग का भारत के साथ कोई संबंध नहीं है, तो मैं उन्हें याद दिलाना चाहता हूं …मॉब लिंचिंग का इस देश के साथ संबंध है…. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जिस तरह से सिख समुदाय के लोगों को मारा गया, वह भी मॉब लिंचिंग था.

बता दें कि मंगलवार को विजयादशमी के मौके पर स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि मॉब लिंचिंग पश्चिमी तरीका है और देश को बदनाम करने के लिए भारत के संदर्भ में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.