निर्भया को इंसाफ : फांसी से बचने के लिए फिर चला एक और दांव, सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश की अर्जी पर बोली ये बात

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निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में मौत की सजा पाने वालों में से एक दोषी ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। दोषी ने राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज किए जाने की ज्यूडिशियल रिव्यू पर तत्काल सुनवाई की मांग की। यह याचिका दोषी मुकेश कुमार सिंह (32) ने दायर की है, जिसकी दया याचिका 17 जनवरी को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने खारिज कर दी थी। मुकेश की याचिका को संज्ञान में लेते हुए, चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ‘अगर किसी को फांसी दी जा रही है तो इससे ज्यादा जरूरी कुछ नहीं हो सकता है’।

SC ने खारिज कर दी थी क्यूरेटिव पिटिशन
मौत की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई क्यूरेटिव पिटीशन के खारिज होने के बाद मुकेश ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश के अलावा अन्य दोषी अक्षय कुमार (31) की भी क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया था। अन्य दो दोषियों पवन गुप्ता (25) और विनय कुमार शर्मा ने अभी तक सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पीटिशन दाखिल नहीं की है।

पटियाला हाउस कोर्ट ने किया अर्जी का निपटारा
इससे पहले दिन में दोषी अक्षय, विनय और पवन की अर्जी का पटियाला हाउस कोर्ट ने निपटारा कर दिया। शुक्रवार को इन तीनों दोषियों ने कोर्ट का रुख किया था और कहा था कि अब तक तिहाड़ जेल प्रशासन ने उनको दस्तावज मुहैया नहीं कराए हैं। कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में कोई निर्देश की जरूरत नहीं है। दोषयों की मांग पर तिहाड़ जेल प्रशासन ने वो सभी दस्तावेज मुहैया करा दिए हैं, जो दोषियों ने मांगे थे। दोषी विनय के वकील ने अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।

एक फरवरी को दी जाएगी फांसी
चार दोषियों – मुकेश (31), पवन गुप्ता (24), विनय शर्मा (25) और अक्षय कुमार सिंह (33) को 1 फरवरी को फांसी दी जानी है। उन्हें दोषी ठहराते हुए सितंबर 2013 में मौत की सजा सुनाई गई थी। मार्च 2014 में हाईकोर्ट ने और मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे बरकरार रखा था। इससे पहले 22 जनवरी को फांसी दी जानी थी, लेकिन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के समक्ष दोषियों की दया याचिका दायर करने के चलते देरी हुई। राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज कर दी गई।

16 दिसंबर 2012 की घटना
बता दें कि दिल्ली की छात्रा निर्भया के साथ चलती बस के अंदर बर्बर तरीके से 16 दिसंबर 2012 को रेप किया गया था। इसके बाद वह उसे सड़क पर छोड़कर चले गए थे। गंभीर हालत में निर्भया को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे सिंगापुर इलाज के लिए भेजा गया था लेकिन उसने दम तोड़ दिया। इस मामले ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जन आक्रोश उत्पन्न किया था।