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‘एक साजिश है ICU वाली ‘पत्रकारिता’, जो सत्ता के इशारे पर खेल रही हैं अंजना’

पत्रकारिता का घिनौना रूप :-

चौतरफा आलोचना के बाद “आजतक” की पत्तलकार “अंजना” मैडम का पत्रकार धर्म जग गया है , और वह कैमरा और माइक लेकर “मुजफ्फरपुर” अस्पताल के आईसीयू में घुस गयी हैं और वहाँ सीमित संसाधनों के माध्यम से बच्चों का इलाज कर रहे डाक्टर्स और नर्सों को परेशान कर रही हैं और अपने पत्रकार , कैमरा और माइक के दंभ को दिखाकर उनको डरा रही हैं।

मुजफ्फरपुर में आई आपदा वहाँ के अस्पताल के डाक्टर्स और नर्सों के कारण नहीं है , यह चापलूसी में अंधी पत्रकारिता कभी नहीं समझेगी , यह सरकार और शासन की घोर लापरवाही और प्रशासन द्वारा अस्पताल की व्यवस्था को जर्जर बना देने के कारण है।

परन्तु अंजना मैडम का माइक सत्ताधारी नेताओं , मंत्रियों के मुँह में नहीं ठूसा जाएगा , वर्ना उनके दो भव्य विदेशी कारों के “शोरूम” की जाँच हो जाएगी और इनकम टैक्स की फाइल खुल जाएगी।

दरअसल , अभी तक सरकार की चापलूसी में लगी और मोदी के जीतने का जश्न मना रही मीडिया “टीवी9 भारतवर्ष” और उसके संपादक अजित अंजुम की मुजफ्फरपुर में मरते बच्चों पर रिपोर्टिंग से खुद को “टीआरपी” में पिछड़ते देख अंजना मैडम मुजफ्फरपुर के आईसीयू में पहुँच गयीं और वहाँ कुछ और बड़ा करने के उद्देश्य से बच्चों का इलाज कर रहे डाक्टर्स और नर्सों से भिड़ गयीं और इलाज में बाधा पहुचाई।

इलाज में लगे नर्सों और डाक्टर्स को एक सेकेन्ड एक सेकेन्ड कह कर रोकने के कारण उस एक सेकेन्ड मे कोई बच्चा इलाज ना मिल पाने के कारण मर गया तो अंजना मैडम की पत्रकारिता उसकी भरपाई करेगी ?

यह पत्रकारिता के स्तर के और गिर जाने का प्रमाण है कि आईसीयू और आपरेशन थिएटर में कैमरा और माइक लेकर प्रथानमंत्री वरदहस्त अंजना ओम कश्यप घुस जाएँगीं। और उनको यह अधिकार मिला हुआ है।

सवाल यह है कि मुजफ्फरपुर के अस्पताल की व्यवस्था करने की ज़िम्मादारी ड्यूटी में कार्यरत डाक्टर्स और नर्सों की है या देश और प्रदेश के स्वास्थमंत्री की ? डाक्टर्स और नर्स तो सीमित संसाधनों के साथ जो भी बन पड़ रहा है कर रही हैं तो आन कैमरा मीडिया पर उनको खलनायक बनाकर दिखाने का कारण क्या है ? इस पत्रकार को यह तक पता नहीं कि डाक्टर्स का काम अस्पताल का इंतजाम देखना नहीं बल्कि मरीजों का इलाज करना मात्र होता है।

यह एक साजिश है जो “अंजना ओम कश्यप” सत्ता के इशारे पर खेल रही हैं , और वह साजिश यह है कि मुजफ्फरपुर में 150 से अधिक बच्चों की मौत का जिम्मेदार अस्पताल , ड्युटी में कार्यरत डाक्टर्स और नर्सों की अक्षमता बताकर सरकार को बचाना और उसके माथे पर लगे 150 कलंक को धोना।

आईसीयू के एक बेड पर 5-5 बच्चे यदि हैं तो यह डाक्टर्स और नर्स के कारण नहीं है , वहाँ अधिक बेड और व्यवस्था ना होने के कारण है , तो कौन उनसे सवाल पूछेगा कि इस अस्पताल में बेड और दवाईयाँ क्युँ नहीं हैं ? डाक्टर और नर्स बेड और दवाईयाँ अस्पताल में लाएँगे ?

माफ कीजिए हर जगह “डाक्टर कफील” नहीं मिलेंगे।

पत्रकारिता का यह रूप बेहद दुखद है कि एक पत्रकार और उसके चैनल की पत्रकारिता को पीछे करने के लिए “आजतक” जैसा संस्थान और उसकी पत्रकार इतने घटिया स्तर पर उतर आया है।

क्या “आजतक” और अंजना ओम कश्यप देश के प्रधानमंत्री और स्वास्थमंत्री के मुँह में माइक डालकर यह पूछेंगी कि जब “आयुष्मान भारत योजना” में प्रति परिवार ₹5 लाख के मुफ्त इलाज की गारंटी सरकार दे रही है तो इस अव्यवस्थित सुविधावीहीन अस्पताल में एक बेड पर 5-5 बच्चों का इलाज क्युँ चल रहा है ? है उस पत्रकार की तरह सरकार से सवाल पूछने की हिम्मत जिसकी लोकप्रियता से घबरा कर आप मुजफ्फरपुर पहुँच गयीं ?

पूछेंगी अंजना मैडम ?

माफ करिए , आपकी फाइल खुल जाएगी , और दोनों भव्य “विदेशी कार शो रूम” में ताले लग जाएँगे।

ये लेख स्वतंत्र टीकाकार मोहम्मद जाहिद के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।

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