उपचुनाव में ही बज गयी थी भाजपा के लिए खतरे की घंटी !

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लखनऊ । दूसरे राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन अब भले ही निराशाजनक दिखायी पड़ रहा हो, लेकिन खतरे की घंटी तो उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में हुए लोकसभा उपचुनाव में ही बज गयी थी। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की तीन गोरखपुर,फुलपुर और कैराना सीट पर इसी वर्ष मार्च में उपचुनाव हुये थे। गोरखपुर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार पांच बार चुनाव जीते थे। इससे पहले उनके गुरू महन्थ अवैद्यनाथ सांसद हुआ करते थे। महन्थ अवैद्य नाथ ​के पहले उनके गुरू महन्थ दिग्विजय नाथ इस सीट से सांसद हुआ करते थे। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें गोरखपुर सीट से इस्तीफा देना पड़ा था। उपचुनाव हुआ था। उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रवीण निषाद जीते थे।

निषाद ने भाजपा के उपेन्द्र दत्त शुक्ल को पराजित किया था। कांग्रेस की सुरहीता करीम ने18858 मत हासिल कर तीसरा स्थान हासिल किया था। उपमुख्यमंत्री बनने के बाद केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई फूलपुर सीट से उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के नागेन्द्र पटेल जीते थे। उन्होंने भाजपा के कौशलेन्द्र पटेल को पराजित किया था। सपा को 342922 वोट मिले थे जबकि भाजपा को 283462 मत हासिल हुये थे। कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था।

भाजपा के कद्दावर नेता रहे हुकुम सिंह की मृत्यु के कारण रिक्त हुई इस सीट पर उनकी पुत्री मृंगाका सिंह को राष्ट्रीय लोकदल की प्रत्याशी तबस्सुम से 49000 से अधिक वोटों से पराजित हो गयी थी। भाजपा के लिये सन्तोष की बात यह रही थी कि बसपा ने उपचुनाव नहीं लड़ा था जबकि कैराना में सपा ने रालोद को समर्थन दे दिया था। नूरपुर विधानसभा सीट पर हुये उपचुनाव में भी भाजपा को शिकस्त खानी पड़ी थी। हालांकि भाजपा के उम्मीदवार को सिकन्दरा विधानसभा सीट के उपचुनाव में जीत हासिल हुई थी।