शतरंज के खिलाड़ी ने ऐसी बिछाई बिसात, अपनेआप फंस गया विपक्ष और खा गया मात

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अमित शाह को आज के दौर की राजनीति का चाणक्य माना जाता है. अमित शाह ने 17 साल की उम्र में ही चाणक्य का पूरा इतिहास पढ़ लिया था. उनके ड्राइंग रूम में भी चाणक्य की तस्वीर लगी हुई है. लेकिन ये बात कम ही लोग जानते हैं कि बीजेपी अध्यक्ष शतरंज के खिलाड़ी रहे हैं. शतरंज के नियम उन्होंने सियासत में भी बखूबी आजमाए हैं. तभी वह जानते हैं कि कौन मोहरा किस जगह राजा और रानी के लिए कब खतरा बन सकता है? कौन किसकी काट के लिए काम आ सकता है?

शतरंज की तरह शाह की सियासत के कोई तयशुदा नियम नहीं हैं, जैसा मौका वैसी चाल. शतरंज के खिलाड़ी की तरह ही चुनाव में भी जीत के लिए काम करते रहना उनका शौक बन गया है. इसीलिए वो बीजेपी के सबसे सफल अध्यक्ष हैं. आज लोकसभा चुनाव में बीजेपी की इस धमाकेदार जीत का असली सेहरा पीएम नरेंद्र मोदी के बाद अगर किसी के सिर बंधता है तो वो हैं अमित शाह.

अमित शाह ने 2019 का चुनाव जीतने के लिए 312 लोकसभा क्षेत्रों का दौरा किया. 161 रैलियां और 18 रोड शो किए. कुल 1.58 लाख किमी की यात्रा की. यह देश की किसी भी पार्टी के अध्यक्ष से अधिक है. उनको करीब से जानने वाले लोग बताते हैं, “शाह को यूं ही चाणक्य नहीं कहा जाता. वह सियासी चक्रव्यूह रचने में माहिर हैं. वह विरोधियों को या तो हाशिए पर कर देते हैं या अपने पक्ष में कर लेते हैं. उन्हें जहां पर सेंध लगानी होती है, वहां की पूरी स्टडी करते हैं. शाह चुनावों के लिए बहुत पहले से उसी तरह तैयारी करते हैं, जैसे प्रतिभावान और मेहनती छात्र लगातार पढ़ाई करते हैं. ”

यह शतरंज के खिलाड़ी अमित शाह की सियासी जादूगरी ही है कि उन्‍होंने कांग्रेस को सिर्फ पांच राज्यों में समेटकर देश का सियासी नक्शा ही बदल दिया है. चुनाव जीतने के लिए अमित शाह ने गणित भी लगाया और केमिस्ट्री भी बनाई. उन पार्टियों से भी समझौता किया, जिनका सिर्फ किसी क्षेत्र विशेष या जाति विशेष में ही प्रभाव था. कोशिश बस पार्टी के लिए जोड़ने की रही. उन्होंने ओबीसी और दलितों को पार्टी से जोड़ने के लिए जातियों के नेताओं को पार्टी में तवज्जो दी. मौर्य, कुशवाहा, यादव, राजभर और निषादों को बड़े पैमाने पर बीजेपी के साथ शिफ्ट करने में वह कामयाब रहे.

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस  मुकाम पर हैं, उसके पीछे सबसे बड़ा किरदार अमित शाह ने ही निभाया है. मोदी लक्ष्य देते हैं तो उसे पूरा करने का जिम्मा अमित शाह पर ही होता है. दोनों के रिश्तों को इसी बात से समझा जा सकता है कि अमित शाह मोदी को साहेब कहकर पुकारते हैं. शायद इसीलिए अमित शाह को मोदी का नाइट वॉचमैन भी कहा जाता है, जो जरूरत पड़ने पर अपनी ही कुर्बानी दे दे.