उत्तर प्रदेश

‘अली-बजरंग बली’ पर सियासी खलबली, बयान देकर EC के राडार पर योगी

लोकसभा चुनाव सिर पर है और प्रचार के आखिरी दिनों में यूपी के सीएम की भाषा सांप्रदायिक ज़हर से भर गई है. एक बार फिर मेरठ के सिसौली गांव में योगी आदित्यनाथ ने चुनाव अली बनाम बजरंग बली बनाने की शर्मनाक कोशिश की. योगी ने अली-बजरंग बली का जुमला फेंकने के लिए मायावती के भाषण का सहारा लिया. उन्होंने कहा कि,’मायावती जी ने कहा हमें केवल मुस्लिमों का वोट मिल जाए, बाकी गठबंधन को कोई और वोट नहीं चाहिए. मैं कहता हूं अगर कांग्रेस, सपा-बसपा, रालोद को अली पर विश्वास है तो हमें भी बजरंग बली पर विश्वास है.’

योगी ने हरा वायरस शब्द का भी भाषण में इस्तेमाल किया. इससे पहले वो अपने ट्विटर पर ये शब्द लिख चुके थे. उन्होंने कहा कि, ’कांग्रेस, सपा, बसपा, रालोद मान चुके हैं कि बजरंग बली के अनुयायी उन्हें वोट नहीं देंगे, उन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे इसलिए ये लोग अली-अली का नाम लेकर हरा वायरस देश को डसने के लिए छोड़ना चाहते हैं’

हापुड़ के पिलखुवा में भी योगी बाज नहीं आए. वहां भी उन्होंने कहा-‘उनका उद्धार अली करेंगे, हमारा उद्धार तो बजरंग बली करेंगे.’ यूं तो योगी अपनी ऐसी ही बयानबाज़ी के लिए आजतक चर्चित रहे हैं लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री पद पर उन्होंने चुनाव से ठीक पहले ऐसी सांप्रदायिक भाषा बोलकर विवादों को आमंत्रित कर लिया.

चुनाव आयोग ने भी योगी की शिकायत करनेवालों की सुन ली है. इलाके के डीएम से रिपोर्ट तलब की गई है. अब देखना ये है कि बार-बार एक ही तरह का ज़हर उगलकर भी योगी बच निकलते हैं या फिर इस बार चुनाव आयोग उन्हें कोई सबक सिखाएगा.

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