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ये नजारा देख कांप गया पाकिस्तान, उड़ा हमारा पहला राफेल विमान

भारतीय वायुसेना को पहला राफेल विमान मिल गया है. फ्रांस में दसॉ एविएशन ने भारतीय वायुसेना को विमान सौंपा. डेप्युटी चीफ एयर मार्शल वीआर चौधरी ने लगभग एक घंटे राफेल में उड़ान भी भरी. इस राफेल विमान का टेल नंबर  RB-01 है, जो भारतीय वायुसेना के अगले चीफ एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया के नाम को दर्शाता है.

राफेल विमान उड़ाने के लिए भारतीय पायलटों के छोटे बैचों को प्रशिक्षित किया गया है. भारतीय वायुसेना मई 2020 तक तीन अलग-अलग बैचों में 24 पायलटों को प्रशिक्षित करेगी. उल्लेखनीय है कि राफेल डील में हुई कथित घोटाले को लेकर भारत में जमकर राजनीति हुई है.

राफेल एक लड़ाकू विमान है. जिसका निर्माण फ्रांस कंपनी दसॉ एविएशन ने किया है. यह दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक उड़ सकता है. यह अधिकतम 24500 किलोग्राम भार उठाकर उड़ान भर सकता है. इसकी अधिकतम स्पीड 2,130 किमी प्रति घंटा और 3700 किलोमीटर कर मारक क्षमता है. राफेल हवा से हवा और हवा से जमीन मार करने वाली मिसाइलों से लैंस है.

भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2001 में अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की मांग की थी. रक्षामंत्रालय ने लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया 2007 से शुरू की. तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता वाली रक्षाअधिग्रहण परिषद ने 126 विमान खरीदने के प्रस्ताव पर सहमति दी. इस सौदे की शुरुआत 5,4000 करोड़ रुपए में होनी थी. 126 विमानों में से 18 विमानों को तुरंत देने की बात थी. लेकिन बाद में किसी कारणवश सौदे की प्रक्रिया रूक गई.

अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेरिस दौरे पर थे. तब 36 राफेल विमान खरीदने का फैसला किया. इसके बाद एनडीए सरकार ने साल 2016 में इस सौदे पर हस्ताक्षर किए. फिर फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांकोइस होलैंड ने भारत का दौरा किया और राफेल विमानों की खरीद पर 7.8 अरब डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर हुए.

 

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