राजनीति

30 साल बाद आखिरकार..मोदीराज में हुआ ऐलान..आडवाणी अब बीजेपी के लिए बेकार !

पहले तो लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी पर मोदी और शाह के दबदबे के बाद बुजुर्गों के लिए बने मार्गदर्शक मंडल में भेज दिए गए और अब टिकट से भी महरूम कर दिए गए हैं. गुजरात की गांधीनगर लोकसभा सीट से लालकृष्ण आडवाणी के न उतरने के साथ ही उनकी चुनावी राजनीति का अंत हो गया है. यह बीजेपी का भी बीते 30 सालों में ऐसा पहला चुनाव होगा, जब वह लालकृष्ण आडवाणी के बिना मैदान में उतरेगी.

भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए गुरुवार को 184 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी.  लिस्‍ट की सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाली बात रही लाल कृष्‍ण आडवाणी का टिकट काटा जाना. गांधीनगर से लालकृष्ण आडवाणी की जगह भाजपा अध्यक्ष अमित शाह चुनाव मैदान में उतरेंगे. माना जा रहा है कि आडवाणी खुद रिटायर नहीं हो रहे थे, ऐसे में पार्टी ने यह कदम उठाया.

14 साल की उम्र में अविभाजित भारत में आरएसएस से जुड़े आडवाणी को जनसंघ की स्थापना के बाद आरएसएस ने राजनीतिक क्षेत्र में भेजा था. श्याम सुंदर भंडारी के निजी सचिव के तौर पर राजनीति से जुड़ने वाले आडवाणी फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. 1957 में पार्टी के संसदीय मामलों की जिम्मेदारी मिलने के बाद दिल्ली आने वाले आडवाणी तब से ही केंद्र की राजनीति के स्तंभ रहे.

1980 में गठित बीजेपी के वह दूसरे अध्यक्ष थे, जिन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के बाद 1986 में जिम्मेदारी मिली थी. यूं तो वह बतौर राज्यसभा सदस्य 1970 से ही संसद का हिस्सा थे, लेकिन लोकसभा में वह 1989 में नई दिल्ली से जीतकर पहुंचे थे. इसके बाद से 2014 तक वे लगातार 8 बार लोकसभा सदस्य रहे. इनमें से गांधीनगर से उन्होंने 6 बार चुनाव जीता.

बीजेपी बनने के बाद से लेकर कल से पहले तक बीजेपी की हर लिस्ट में सबसे ऊपर उनका नाम होता था. लेकिन सिर्फ कल से पहले तक. अब वो बीजेपी उम्मीदवार नहीं हैं. क्योंकि आज की बीजेपी को शायद उनकी जरूरत नहीं है.

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