80 प्रतिशत लोग अपनी सेहत के प्रति करते हैं ये बड़ी गल्तियां, जानिए और समझिए 

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आपने देखा होगा कि अधिकतर लोग मलों के वेगों को रोकने का प्रयास किया करते हैं जैसे मल, मूत्र, अपानवायु, छींक, भूख, प्यास, नींद, खांसी, मेहनत के कारण सांस का रोकना, जम्हाई, आंसू, या वीर्य के वेगों को रोका करते हैं और इनके कारण नाना प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं। लोग रात्रि में देर तक जागते हैं और दिन में देर तक सोते है।
सूर्य की धूप न लेना
जब कि सारे विश्व के चिकित्सक मानते हैं कि सुबह उठते सूर्य की गुलाबी किरणें नंगे शरीर पर पड़ने से अमित शक्ति व आरोग्य प्राप्त होता है। आरोग्य बढ़ाने के लिए धूप सेवन के बारे में श्रीमद् रामचरित मानस में श्री तुलसीदास जी ने लिखा है ‘सेइये भानु पीठ उरू आगी’’ अर्थात सूर्य का सेवन पीठ पर करना चाहिए। विश्व के बहुत से उपचारक धूप की किरणों के द्वारा रोगों के उपचार किया करते हैं।

प्रातः उठते ही भरपेट शुद्ध ताजा पानी चाहिए। प्रायः मनुष्य तेल मालिश और पर्याप्त मेहनत, कसरत या खेलकूद नहीं करते हैं और स्वार्थ या लोभ के कारण अपनी शक्ति एवं सामथ्र्य से अधिक खाना अथवा कार्य करते हैं।
 
झूठी शान दिखाना
अपनी शान दिखाने के लिए अटपटे कार्य जो उनकी हिम्मत से बाहर हैं, करते हैं। जैसे मौसम के अनुसार कपड़े नहीं पहनते, शक्ति से अधिक खाने का, बोझ उठाने का या किसी चीज को खींचने का कार्य करते हैं। जिससे वह रोगी होते हैं, और कमर के पास रीढ़ की हड्डी खिसक जाती है मतलब यह कि स्लिप डिस्क के कारण कमर दर्द आदि हो जाते हैं।
 
लोग पायः एकदम गर्म वातावरण से आकर कूलर के सामने बैठ जाते है और ठंडे वातावरण से उठकर गर्म वातावरण (धूप) में चले जाते हैं, जिनसे दर्दों के रोग या जुकाम आदि हो जाते हैं।
माँ से बच्चों को खतरा
शायद ही आपको पता हो कि खाना खाने के छः घंटों तक स्त्री संग करना हानिकारक होता है। माताओं को स्नान, क्रोध या सहवास के आधे घंटे बाद शांत होकर ही बच्चों को स्तनपान कराना चाहिए, नहीं तो वह बच्चे रोगी हो जाते हैं। माताओं को लेटे-लेटे, करवट से लेटे बच्चे को स्तनपान नहीं कराना चाहिए इससे बच्चों को कान बहने के रोग हो जाते हैं।
कमर का न कसना
बच्चे की कमर में करधनी अवश्य बांधनी चाहिए, इससे आंते उतरने की संभावना मिट जाती है। बड़े होने पर सभी व्यक्ति मेहनत के काम करते समय कमर कसी रखते हैं। चाहे धोती की फेंट से, चाहे पजामें के नाड़े से, चाहे निक्कर या पेंट की बैल्ट से। पुलिस और मिलिट्री में तो बैल्ट बांधना अनिवार्य ही माना जाता है, क्योंकि मेहनत के समय कमर कसी न होने पर आंते उतरने या कमर के दर्द के रोगों की संभावना रहती है।
आँखों की रक्षा न करना
नेत्रों को तेज धूप या तेज रोशनी से और धूल व धुंए से बचाये रखना अति आवश्यक होता है। दिन में चार बार नेत्रों को मुख मे जल भर कर शीतल जल के साफ पानी से छींटे देकर धोते रहना चाहिए और रात में कोइ सुरमा, काजल या नेत्र-रक्षक ड्राॅप डालनी चाहिए।