धर्म

रमजान 2019 : इस्‍लाम में 786 नंबर को क्यों माना जाता है सबसे पवित्र ?

हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म माना जाता है। हिंदू धर्म में पवित्र कहानियों और ईश्वर का उल्लेख मिलता है। इन कहानियों में प्रेम, युद्ध आक्रमकता, आविष्कार, विध्वंस का समावेश रहता है। इन पौराणिक कथाओं में कई चरित्र होते हैं और उनके कई भूमिकाएं ऐतिहासिक हैं। जैसे कि हिंदू धर्म में पवित्र ऊँ शब्द में एक लाख अर्थ समाए हुए हैं ठीक वैसे ही मुस्लिम धर्म में पवित्र संख्या 786 ओम का ही एक रूप है। वहीं ये भी कहा जाता है कि ये अंक केवल इस्लाम में ही नहीं बल्कि हिंदू लोग भी मानते है।

जिस प्रकार से कोई भी काम शुरू करने पहले हिंदू भगवान का नाम लेते हैं ठीक उसी प्रकार इस्लाम धर्म में कोई भी काम करने से पहले 786 का नाम लिया जाता है। कहा जाता है कि इस्‍लाम धर्म में 786 का मतलब बिस्मिल्लाह उर रहमान ए रहीम होता है लेकिन कुछ हिंदू यह मानते है कि 786 की संख्या ओम है।

आपको ये पता है कि म्रिस में अभी भी मुसलमानों के बीच में ये आम धारणा है कि “बिस्मिल्लाह” के बदले हम 786 लिख सकते है और दोनो के मायने एक ही है। ये धारणा दुनिया में सबसे ज़्यादा हिन्दुस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार तथा बांग्लादेश में ज़्यादा है। यहां पर बहुत आम तौर पर दुकानों, घरों की दीवारों तथा दरवाज़ों पर आपको “786” लिखा मिल जायेगा, बच्चों की किताबों, इम्तिहान की कापी पर लिखा मिल जायेगा। बहुत से मुसलमान “786” को तावीज़ के तौर पर गले मे पहनते हैं और इन तीन अंको को शुभ मानते है।

सनातन धर्म के मुताबिक 786 का मतलब ऊँ होता है। राफेल पताई अपनी पुस्तक ‘द जीविस माइंड’ में बताते हैं तंत्र और गुलामी की दास्ता के बीच यह संसार रहता है। पवित्र कुरान की सभी अरबी प्रतियों पर अंकित रहस्यमय अंक 786 है।

अरबी विद्वानों ने परमात्मा के रूप में इस विशेष अंक का चुनाव निर्धारित कर इसे ईश्वर के समान दर्जा दिया। अगर इस जादुई संख्या को संस्कृत में लिखा जाए तो ऊँ जादुई संख्या 786 दिखाई देगा।

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