राम मंदिर के लिए तैयार हो रहा 2100 किलो की घंटा, मुस्लिम कारीगरों को मिला ये जिम्मा

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सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में जन्मस्थान पर विराजने वाले रामलला के भव्य राम मंदिर में लगाया जाने वाला घंटा एटा जिले के जलेसर नगर में तैयार हो रहा है। यह घंटा 2100 किलोग्राम वजन का होगा। इसके अगले दो माह में तैयार हो जाने की आशा है।

इस घंटे को तैयार करा रहे जलेसर के उद्यमी तथा नगर पालिका अध्यक्ष विकास मित्तल ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ को बताया है कि कापर, जिंक, एल्यूमीनियम व लैड नामक मिश्रित धातुओं से बना यह घंटा 7 फीट ऊंचा तथा 5 फीट व्यास का होगा। यह उनके कारखाने में बना अब तक का सबसे बड़ा घंटा होगा। इसके निर्माण में लगभग 12 से 15 लाख रुपये लागत आएगी।

विकास मित्तल के अनुसार इस घंटे का आदेश उन्हें वाराणसी के एक व्यापारी से मिला है। उद्यमी मित्तल के अनुसार उनके कारखाने में निर्मित 500 किलोग्राम से लेकर 1500 किलोग्राम के घंटे वर्तमान में देश के कई सुप्रसिद्ध मंदिरों में लगे हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केदारनाथ में चढ़ाने के लिए जो घंटा ले गये थे, वह भी इसी कारखाने में निर्मित किया गया था। इसके अलावा उनके द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एटा दौरे के समय उन्हें भेंट किया घंटा वर्तमान में गोरखनाथ पीठ मंदिर में शोभायमान है। यह घंटा उनके द्वारा निर्मित कराए गये घंटों में सबसे बड़ा होगा।

अयोध्या के राममंदिर में लगने वाले इस घंटे की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसकी डिजाइन और फ्रेमिंग लगभग 15 दिनों में मुस्लिम कारीगर भुर्रा मिस्त्री ने तैयार की है। मित्तल के अनुसार फ्रेम पर ढलाई आदि का काम अगले दो माह में पूरा कर लिया जाएगा। मित्तल इस बात के लिए भी आश्वस्त हैं कि राम मंदिर में लगने वाले अन्य घंटों के निर्माण का दायित्व भी उन्हें ही मिलेगा।

4 लाख रूपए होगी घंटे की कीमत 

घंटा बनाने वाली कम्पनी के मालिक विकास मित्तल ने बताया इस घंटे का वजन 2100 किलो के करीब है। उन्होंने बताया राम मंदिर के लिए देश के सभी मंदिरों से बड़ा और भारी घंटा बनाया जा रहा है। इस घंटे में पीतल के साथ ही लोहे अल्युमीनियम का भी प्रयोग किया जा रहा है जिससे इसकी मजबूती बनी रहे। विकास ने बताया कि इस घंटे की कीमत तकरीबन 14 लाख रूपए होगी। इसे बनने के बाद वास्तविक मूल्य बताया जा सकता है। लेकिन 14 लाख रूपए लगने का अनुमान है।

30 कारीगर काम करके 3 महीने में पूरा करेंगे काम 
विकास ने बताया कि इस घंटे को बनाने में तक़रीबन 30 कारीगर लगाए गए हैं। ये सभी मिलाकर इस घंटे को 3 महीने में बना लेंगे ऐसा अनुमान है। इसी तरह के 10 और घंटे भी बनाए जा रहे हैं। उनका वजन इस घंटे से थोड़ा कम है।

कटप्पा मंदिर के लिए बनवाया था 15 सौ किलो का घंटा 
विकास ने बताया कि वाराणसी के व्यापारी श्याम सुंदर के कहने पर 21 सौ किलो का ये घंटा बनवाया जा रहा है। हाल ही में उन्होंने कर्नाटका के कटप्पा मंदिर के लिए 15 सौ किलो का घंटा बनवाया था। उसे वहां भेजा जा चुका है।