जरा हट के

1500 वर्ष पुरानी मूर्ति का जब हुआ ‘CT Scan’, रिपोर्ट देख डॉक्टर्स की आंखें भी फटी रह गईं !

ये दुनिया जितनी गोल है, उतने ही इसमें झोल हैं. धरती पर आज भी ऐसी लाखों चीज़ें हैं, जिनके बारे में मनुष्य अनजान हैं. ऐसे में विज्ञान भी हार मानने को तैयार नहीं है और अपनी रिसर्च में जुड़ कर आए दिन हमे हैरान कर देने वाले राज़ बयाँ कर रहा है. इनमे से कुछ राज़ तो ऐसे भी हैं, जिनपर एक बार में विश्वास करना मुश्किल ही नहीं बल्कि ना-मुमकिन लगता है.  विज्ञान की मदद से देश और दुनिया में आय दिन रहस्मयी जगहों पर खुदाई की जा रही है और इनके रहस्यों से पर्दा हटाया जा रहा है. इन रिसर्च के परिणाम जान कर कोई भी सन्न रह सकता है.

ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे ही रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आपके पैरों तले से ज़मीन ही खिसक जाएगी. दरअसल, आज हम बौध धर्म के भिक्षु के बारे में आपको रूबरू करवाने जा रहे . बौध भिक्षु को लेकर हाल ही में विज्ञान ने हैरान कर देने वाले दावे किए हैं जिन पर एक बार में यकीन कर पाना मुश्किल है. मगर इससे पहले हम आपको बता दें कि बौध धर्म के अनुयायी भारत समेत दुनिया के अन्य कई देशों में भी मौजूद है. हमारे एशिया में लाखों की गिनती में बौध धर्म के लोग रहते आ रहे हैं. एशिया में खासकर चीन, थाइलैंड और वियतनाम जैसे देशों में इनकी संख्या अधिक है.

ऐसे में इन जगहों पर विज्ञान अपनी नई नई खोज करने में जुटा रहता है और कईं बार रिसर्च में वैज्ञानिकों के हाथ कुछ ऐसी अजीबो गरीब चीज़ें  लग जाती हैं जोकि अपने अंदर कईं रहस्य समेटे हुए रहती हैं. हाल ही में वैज्ञानिकों को अपनी रिसर्च के दौरान एक ऐसी चीज़ हाथ लगी है जिसे देख कर हर कोई हैरान है. दरअसल, यह चीज़ कोई और नहीं बल्कि बौध धर्म के गुरु की एक मूर्ति है. इस मूर्ति की तसवीरें इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं और काफी वायरल जा रही है. विज्ञानिकों द्वारा ऐसा दावा किया जा रहा है कि यह मूर्ती करीब 1500 साल या उससे भी अधिक पुरानी है.

आपकी जानकारी के लिए हम आपको  बता दें कि इस मूर्ती की खोज नीदरलैंड के कुछ वैज्ञानिकों ने मिल कर की है. मूर्ती को देखने के बाद सभी वैज्ञानिकों का यह दावा है कि यह मूर्ती आम मूर्तियों की तरह नहीं है बल्कि इसमें कुछ ना कुछ अलग और खास जरुर है. वहीं जब इस मूर्ति की सच्चाई जानने के लिए वैज्ञानिकों ने सीटी स्कैन कराने का फैसाल लिया, जिसके बाद जांच के दौरन जो सच्चाई सामने आई उसने वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया. शोध के दौरान पता चला कि इस मूर्ती के अंदर एक मम्मी है जो कि पिछले सैन्दों सालों से ध्यान में बैठी है. इ बीच  और सच्चाई सामने आई कि बौध भिक्षु  लोग खुद को ज़मीन के अंदर लीन कर लेते थे और वहां सांस लेने के लिए बांस की लकड़ियों का इस्तेमाल किया करते थे.

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