मायानगरी

‘आर्टिकल 15’ के विरोध पर डायरेक्टर ने लिखा खुला खत, सबको समझनी चाहिए उनकी ये बात

इस शुक्रवार को रिलीज होने जा रही अपनी नई फिल्म आर्टिकल15 के निर्देशक अनुभव सिन्हा ने रिलीज से दो दिन बीते बुद्धवार को एक सार्वजनिक पत्र लिखा। अपनी इस फिल्म का विरोध कर रहे जातिगत संगठनों के नाम इस पत्र को अनुभव सिन्हा ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

इस पत्र में अनुभव सिन्हा ने दोहराया है कि उनकी फिल्म ब्राह्मण या किसी दूसरे समाज का न तो विरोध करती है और न ही अपमान करती है। अनुभव सिन्हा पत्र में लिखते हैं कि उनकी फिल्म का विरोध ट्रेलर के आधार पर हो रहा है, जबकि किसी ट्रेलर में फिल्म की पूरी कहानी नहीं बताई जा सकती। सिन्हा ने पत्र में ये भी जोड़ा है कि अगर ट्रेलर से किसी का दिल दुखा हो, तो वे माफी मांगते हैं। खबरों के मुताबिक, इस मामले को लेकर अनुभव सिन्हा को लगातार धमकियां मिल रही हैं। उनकी हत्या से लेकर परिवार की महिलाओं को लेकर इन धमकियों में अपशब्द कहे जा रहे हैं।

सिन्हा ने इन धमकियों की शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी है। अनुभव सिन्हा की ये फिल्म एक ऐसे पुलिस अधिकारी की कहानी है, जो यूपी के एक गांव में नीची जाति की अव्यस्क बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले की पड़ताल करता है, तो इस केस में कुछ पुलिसकर्मियों के साथ एक उच्च जाति का युवक दोषी साबित होता है। यूपी, बिहार और राजस्थान में इस फिल्म के खिलाफ चल रहे विरोध अभियान में इस फिल्म को ब्राह्मण समाज का अपमान बताया जा रहा है।

बिहार सहित कई राज्यों में इस फिल्म के खिलाफ कोर्ट केस लगे हैं। सेंसर ने इस फिल्म को यूए सार्टिफिकेट जारी किया है। फिल्म में पुलिस अधिकारी की केंद्रीय भूमिका निभाने वाले आयुष्मान खुराना का कहना है कि जब सेंसर बोर्ड से फिल्म को सार्टिफिकेट मिल गया, तो विरोध का आधार खत्म हो जाता है। उन्होंने अपील की है कि सभी लोग सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देखें और फिर खुद सच्चाई महसूस करें कि ये फिल्म सिर्फ इस बात पर जोर देती है कि किसी भी स्तर पर समाज या सरकार देश के किसी नागरिक के साथ कोई भेदभाव न करे, जैसा संविधान के आर्टिकल पंद्रह में रेखांकित किया गया है।

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