देश

हरी झंडी दिखाने के अगले ही दिन गड़बड़ी, तीन घंटे जंगल में खड़ी रही वंदे भारत एक्सप्रेस

पूरी तरह से देश में निर्मित आधुनिक तकनीक वाली भारत की सबसे तेज ट्रेन ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ में शनिवार सुबह गड़बड़ी आ गई। ट्रेन वाराणसी से दिल्ली वापस लौट रही थी, तभी उत्तर प्रदेश के टूंडला जंक्शन से 18 किलोमीटर की दूरी पर सुबह 5:30 बजे ट्रेन रुक गई। हालांकि करीब 8:15 बजे ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना हो गई। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले ही इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। इस अवसर पर रेल मंत्री पीयूष गोयल और रेलवे बोर्ड के सदस्य उपस्थित थे। रविवार से यह ट्रेन आम लोगों के लिए शुरू होने वाली थी, लेकिन ट्रेन में खराबी के चलते रविवार को इसके पहले कमर्शियल रन को लेकर स्थितियां साफ नहीं हैं।

डिब्बों के ब्रेक जाम
ट्रेन में अचानक आई इस खराबी का कारण ट्रेन को रुकना पड़ा। इस दौरान ट्रेन दिल्ली से करीब 200 किमी की दूरी पर थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रेन की अंतिम चार बोगियों में बिजली गुल हो गई और आखिरी के कुछ डिब्बों के ब्रेक जाम हो गए, जिसके चलते ट्रेन रुकी। समस्या के बाद से इंजीनियर प्रिंसिपल चीफ मैकेनिक इंजीनियर उत्तर रेलवे के संपर्क में हैं। ट्रेन पर मौजूद इंजीनियरों ने वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि ट्रेन के कंट्रोल्स भी फेल हो गए। खबर है कि ट्रेन को ठीक करने के लिए दिल्ली की जगह निकटम मेंटेनेंस शेड में ले जाया जाएगा। फिलहाल इस गड़बड़ी को ठीक नहीं किया जा सका। इस ट्रेन में मौजूद यात्रियों को दो अन्य ट्रेन के जरिए अपने गंतव्य के लिए रवाना किया गया है।

वंदे भारत एक्सप्रेस
वंदे भारत एक्सप्रेस का निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में 18 महीने में किया गया है। इस ट्रेन को सेमी हाई स्पीड ट्रेन 18 कहा गया, जिसका नाम हाल में ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ रखा गया था। यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकती है और इसमें शताब्दी ट्रेनों जैसी यात्री श्रेणी लेकिन बेहतर सुविधाएं हैं। ट्रेन के लिये टिकट की बुकिंग शुरू हो गयी है और आम जनता के लिए यह ट्रेन 17 फरवरी से दिल्ली से वाराणसी के बीच सप्ताह में पांच दिन चला करेगी।

री-जेनरेटिव ब्रेक प्रणाली
इस ट्रेन के अंदर 16 कोच हैं, वाई-फाई, जीपीएस बेस्ड यात्री सूचना प्रणाली, स्पर्श मुक्त जैव शौचालय, एलईडी लाइट, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट और उपस्थित यात्रियों तथा मौसम के अनुसार तापमान को कम ज्यादा करने में सक्षम मौसम नियंत्रण प्रणाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध है। ट्रेन के अंदर एडवांस्ड सस्पेंशन सिस्टम लगाया गया है जिसकी वजह से ट्रेन के अंदर बैठे यात्रियों को मामूली झटका भी नहीं लगेगा। कार्बन फुटप्रिंट रोकने के लिए रेल गाड़ी में री-जेनरेटिव ब्रेक प्रणाली लगाई गई है, जिससे 30 प्रतिशत बिजली की बचत होगी। इस ट्रेन में कुल 1,128 यात्रियों के बैठने की क्षमता है।

Back to top button