सुशांत को एकसाथ दिए जा रहे थे दवा और ड्रग्स, शरीर पर हो रहा था ऐसा असर

0
114

 

सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस में रिया चक्रवर्ती को एनसीबी (Narcotics Control Bureau ) द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य सबूतों के साथ ही इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि रिया चक्रवर्ती अब इस बात को स्वीकार कर चुकी हैं कि वे सुशांत सिंह राजपूत के लिए ड्रग्स मंगाया करती थीं और उनके साथ खुद भी इसका सेवन करती थीं। जबकि रिया जानती थीं कि सुशांत डिप्रेशन में हैं और उनका इलाज चल रहा है। ऐसे में सुशांत ड्रग्स भी ले रहे थे और दवाइयां भी ले रहे थे, जिसका उनके शरीर पर बहुत अधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था…

सुशांत की बुरी हालत के लिए रिया जिम्मेदार क्यों?
-NCB ने अपनी पूछताछ के दौरान रिया से जब यह सवाल किया कि यह जानते हुए भी कि सुशांत साइकाइट्रिस्ट्स से इलाज ले रहे हैं और मेंटल हेल्थ के लिए दवाइयां भी ले रहे थे, ऐसे में उन्होंने सुशांत के लिए लगातार ड्रग्स का अरेंजमेंट क्यों किया? वे जिस किसी इंसान को भी अपना मानती हैं, उसे दवाएं देंगी या ड्रग्स? सूत्रों के अनुसार, इस सवाल पर रिया ने चुप्पी साथ ली।

-यह एक ऐसी स्थिति बन रही है, जो इस बात को साफ कर रही है कि रिया (Rhea Chakraborty) सुशांत की मानसिक हालत बिगड़ने के लिए जिम्मेदार हैं। खैर, हम इस विषय पर बात करते हैं कि आखिर एक व्यक्ति जो मेंटल हेल्थ के लिए दवाएं भी ले रहा है और साथ में ड्रग्स का सेवन भी कर रहा है, उसके शरीर पर दोनों चीजों के सेवन का कैसा असर पड़ता है।

सुशांत ले रहे थे ये दवाएं
-सुशांत (Sushant Singh Rajput) की मानसिक हालत और उनके ट्रीटमेंट से जुड़ी जिस तरह की जानकारी सामने आ रही है, उसके अनुसार सुशांत अन्य दवाओं के साथ ही फ्लूनिल और इटिजोलम नाम की दवाएं ले रहे थे। ये दवाएं इंसान के दिमाग में सेरोटॉनिन नामक केमिकल बढ़ाने में मदद करती हैं।

दिमाग को शांत रखता है सेरोटॉनिन
-सेरोटॉनिन हमारे शरीर में एक न्यूरोट्रांसमीटर की तरह काम करता है। यह दिमाग को शांत रखने और नकारात्मक विचारों से बाहर निकालने में मदद करता है। जबकि ड्रग्स (नशे के लिए ली गई चाहे कोई भी ड्रग हो) हमारे शरीर में जाकर इस सेरोटॉनिन न्यूरोट्रांसमीटर को कम करने का काम कर सकती हैं और डोपामाइन की मात्रा को बहुत अधिक बढ़ा देती हैं।

-यानी एक ही समय पर सुशांत के शरीर में दो अलग-अलग तरह के केमिकल जा रहे थे, एक दवाई के रूप में और एक ड्रग के रूप में। ये दोनों ही केमिकल अपनी प्रकृति और प्रभाव में एक-दूसरे के एकदम विपरीत काम करते हैं। अर्थात सुशांत के दिमाग में दवाएं सेरोटॉनिन बढ़ा रही थीं तो ड्रग्स डोपामिन को जरूरत से अधिक बढ़ा रहीं थी।

…और बिगड़ गई सुशांत की हालत
-एक ही समय पर दो अलग तरह के केमिकल लगातार शरीर में जाने से डिप्रेशन और एंग्जाइटी से जूझ रहे सुशांत को हैलुसिनेशन (Hallucination) की समस्या होने लगी थी (जानकारी के आधार पर) जिससे उनकी मानसिक हालत लगातार बिगड़ती चली गई। एक सीनियर सायकाइट्रिस्ट के अनुसार, जब दिमाग में डोपामिन की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है तो व्यक्ति को अपने चारों तरफ वैसी आवाजें सुनाई देने लगती हैं और घटनाएं घटती हुई महसूस होने लगती हैं,जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं होता है।

– जब व्यक्ति वास्तविक दुनिया से एकदम दूर काल्पनिक दुनिया में जीने लगता है और उन आवाजों को सुनने लगता है, जो वास्तव में नहीं होती हैं तो इसी स्थिति को हेलूशिनेशन (Hallucination) कहते हैं। अभी इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते कि सुशांत की हत्या हुई है या उन्होंने आत्महत्या की है, लेकिन यह बात साफ है कि उनके आस-पास रहनेवाले लोगों ने उनकी मानसिक हालत का वैसे ध्यान नहीं रखा जैसे कि रखा जाना चाहिए था।

इन चीजों की होती है जरूरत

-मानसिक रोगों से जूझ रहे लोगों को सबसे अधिक अपनेपन, प्यार और भरोसे की जरूरत होती है। क्योंकि अपनी बीमारी के कारण वे भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुजर रहे होते हैं। इस स्थिति में परिवार और दोस्तों को उनकी भावनाओं को समझते हुए डॉक्टर्स द्वारा दी गई गाइडलाइन्स को फॉलो करना होता है।