सावन विशेष : शिवलिंग पर मत चढ़ाएं ये 7 चीजें, भोलेनाथ हो जाएंगे नाराज

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आखिर शिव में ऐसा क्या है, जो उत्तर में कैलाश से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम् तक वे एक ही रूप में पूजे जाते हैं। शिवजी कैलाश में भी रह लेते हैं और शमशान में भी। उन्हें पंचमेवा भी भाता है और विषधारी कांटेदार धतुरा भी। भगवान शिव को बैरागी कहा जाता है। यही वजह है कि उनके शिवलिंग पर कभी भी आम जिन्दगी में इस्तेमाल होने वाली चीजें नहीं चढ़ाई जाती हैं।

शिवजी को किसी से मोह नहीं और हर माया के बंधन से मुक्त, फिर भी जल्द प्रसन्न होने वाले देव हैं। भोले भंडारी खुशी में उत्सव प्रिय देवता है और श्मशान में उत्सव मनाने वाले वे अकेले देवता है। सभी देवों में वे एकमात्र महादेव हैं। वे आदि हैं और अंत भी। कहा जाता है कि भोलेनाथ की पूजा करने से वही नही बल्कि सारे भगवान ख़ुश हो जाते हैं। शिव पुराण के अनुसार शिव जी के भक्तों को शिवलिंग पर कभी भी ये वस्तुएं नहीं चढ़ानी चाहिए। अगर आप भी इस सावन भोलेबाबा के व्रत या उनकी पूजा करने वाले हैं तो भूलकर भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये चीजें। आइए जानते हैं सावन के महीने में भोले भंडारी को कौन सी चीजें नहीं अर्पित करनी चाहिए।

हल्दी- शिवलिंग पर कभी भी हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। क्योंकि यह महिलाओं की सुंदरता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होती है। और भगवान शिव तो वैसे ही सुंदर है। जिसके कारण भगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग पर हल्दी नही चढाई जाती है। तो हमेश याद रखिये जब भी आप सावन में शिवलिंग पूजन के लिए जाए तो शिव जी को हल्दी का लेप न लगाए। हल्दी की तरह ही शिव की पूजा में कुमकुम चढ़ाना वर्जित माना गया है। शिवलिंग की पूजा में कभी भी कुमकुम को शामिल नहीं करना चाहिए। कुमकुम सुहाग की निशानी है। शिव पूजा में चंदन का इस्तेमाल शुभ माना गया है।

नारियल पानी- नारियल देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है जिनका संबंध भगवान विष्णु से है इसलिए शिव जी को नहीं चढ़ता। शिव जी की पूजा नारियल से होती है लेकिन नारियल पानी से नहीं क्योंकि शिवलिंग पर चढ़ाई जाने वाली सारी चीज़ें निर्मल होनी चाहिए यानि जिसका सेवन ना किया जाए। नारियल पानी देवताओं को चढ़ाये जाने के बाद ग्रहण किया जाता है इसीलिए शिवलिंग पर नारियल पानी नहीं चढ़ाया जाता है।

शंख जल- भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है जो भगवान विष्णु का भक्त था। इसलिए विष्णु भगवान की पूजा शंख से होती है शिव की नहीं। इस लिए हमेश ध्यान रखे कि शिव को जल अर्पण करते बक्त या फिर पूजन के समय शंख का इस्तेमाल शास्त्रों के अनुसार वर्जित है।

तुलसी का पत्ता न चढ़ाएं- तुलसी को भगवान व‌िष्‍णु ने पत्नी रूप में स्वीकार क‌िया है। इसल‌िए तुलसी से श‌िव जी की पूजा नहीं होती। शिव पुराण के अनुसार जालंधर नाम का असुर भगवान शिव के हाथों मारा गया था। जालंधर को एक वरदान मिला हुआ था कि वह अपनी पत्नी की पवित्रता की वजह से उसे कोई भी अपराजित नहीं कर सकता है। लेकिन जालंधर को मरने के लिए भगवान विष्णु को जालंधर की पत्नी तुलसी की पवित्रता को भंग करना पड़ा। अपने पति की मौत से नाराज़ तुलसी ने भगवान शिव का बहिष्कार कर दिया था।

त‌िल या तिल से बनी कोई वस्तु न चढ़ाएं- यह भगवान व‌िष्‍णु के मैल से उत्पन्न हुआ मान जाता है, इसल‌िए इसे भगवान श‌िव को नहीं अर्प‌ित क‌िया जाना चाह‌िए। याद रखे भगवन शिव विष्णु जी के आराध्य के रूप में पूजनीय है। शास्त्रों के अनुसार विष्णु जी के मैल से उत्पन्न तिल का प्रयोग शिव पूजन में पूर्णतः वर्जित माना गया है।

कभी न चढ़ाएं टूटे हुए चावल- भगवान श‌िव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्प‌ित क‌िए जाने के बारे में शास्‍त्रों में ल‌िखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है, इसल‌िए यह श‌िव जी को नहीं चढ़ता। ध्यान योग्य बात ये है कि शास्त्रों के अनुरूप अक्षत का प्रयोग अभिषेक के रूप में होता है। एवं अक्षत का प्रयोग हल्दी व कुमकुम के साथ शुभ होता है। चूँकि हल्दी व कुमकुम दोनों ही वस्तुए शिव पूजन में वर्जित है इस तरह टूटे हुए चावल शिव पूजन में पूर्णतः निषेध है। चावल की जगह जौं का प्रयोग अत्यंत शुभ होता है।

केतकी फूल- केतकी के फूल एक बार ब्रह्माजी व विष्णुजी में विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ होने का दावा कर रहे थे और भगवान विष्णु पूरी सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ कह रहे थे। तभी वहां एक विराट लिंग प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने सहमति से यह निश्चय किया गया कि जो इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा उसे ही श्रेष्ठ माना जाएगा। अत: दोनों विपरीत दिशा में शिवलिंग की छोर ढूढंने निकले।

छोर न मिलने के कारण विष्णुजी लौट आए। ब्रह्मा जी भी सफल नहीं हुए परंतु उन्होंने आकर विष्णुजी से कहा कि वे छोर तक पहुँच गए थे। उन्होंने केतकी के फूल को इस बात का साक्षी बताया। ब्रह्मा जी के असत्य कहने पर स्वयं शिव वहाँ प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्माजी की एक सिर काट दिया और केतकी के फूल को श्राप दिया कि शिव जी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं होगा।

घर में शिवलिंग स्थापना विधि

देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए, लेकिन शिवलिंग रख सकते हैं, क्योंकि शिवलिंग को कभी भी खंडित नहीं माना जाता है। शिवलिंग को निराकार रूप माना गया है। इस वजह से टूटा शिवलिंग भी पूजनीय होता है। शिवपुराण के अनुसार घर में शिवलिंग ज्यादा बड़ा नहीं रखना चाहिए। घर में छोटा शिवलिंग रखना शुभ रहता है। हमारे अंगूठे के पहले पोर से बड़े आकार का शिवलिंग घर में रखने से बचना चाहिए। घर में शिवलिंग ऐसी जगह पर न रखें, जहां रोज साफ-सफाई नहीं होती है। यदि घर में शिवलिंग रखना है तो पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।

शिवलिंग का पूजन करते समय भक्त का मुंह उत्तर दिशा की ओर हो तो वह सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। रोज सुबह-शाम शिवलिंग की पूजा जरूर करें। अगर विधिवत पूजा नहीं कर पाते हैं तो दीपक जरूर जलाएं। दीपक जलाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप 108 बार करें। मंत्र जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए। शिवलिंग के साथ ही गणेशजी, माता पार्वती, नंदी की भी मूर्तियां जरूर रखें। पूजा की शुरुआत में गणेश पूजन से करना चाहिए।

सावन में शिवलिंग पूजन विधि

सोमवार को शिव मंदिर जाकर शुद्ध आसन पर बैठकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें। 108 बेलपत्र पर राम नाम लिखकर चढ़ाएं। गाय का दूध लें। पहले दूध अर्पित करें। अब इत्र से भगवान को स्नान कराके गुलाल लगाएं। फिर गंगाजल से शिव जी का अभिषेक करें। शहद भी अर्पित करें। पूरे शिवलिंग को पुष्पों, बेलपत्र तथा अबीर , गुलाल, चंदन से समर्पित कर श्रृंगार करें। पीली धोती शिवलिंग पर चढ़ाएं। माता पार्वती को चुनरी चढ़ाएं। पूरे शिव परिवार को जल दें।

शिव मंदिर में श्री रामचरित मानस का सम्पूर्ण पाठ कराएं। यदि आप स्वयं करना चाहते हों तो मास परायण करिये। शनि से प्रभावित लोग सुंदरकांड का पाठ करें। विद्या में प्रगति के लिए अरण्यकाण्ड का पाठ करें। कुवांरी कन्याएं मानस में वर्णित शिव पार्वती विवाह का पाठ करें जिससे योग्य तथा सुंदर वर की प्राप्ति होती है। महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करने से रोगों से मुक्ति मिलती है।