सावन विशेष : शिवपुराण में ऐसा बताया गया है कलयुग, जानिए

0
63

 

जैसे जन्म के बाद मृत्यु निश्चित है वैसे ही युगो का परिवर्तन भी निश्चित है। हिन्दू धर्मग्रंथों में युगो को चार युग में बांटा गया है –सतयुग,त्रेतायुग,द्वापरयुग और कलयुग। अभी कलयुग चल रहा है। हमारे धर्मग्रंथों में कलयुग के बारे में पहले ही बता दिया गया है की कलयुग में क्या क्या होगा। आज के इस पोस्ट में हम बताएँगे की शिवपुराण के अनुसार कैसा होगा कलयुग।

कैसा होगा कलयुग

घोर कलयुग आने पर मनुष्य पुण्यकर्म से दूर रहेंगे,दुराचार में फंस जायेंगे और सब के सब  सत्य भाषण से मुंह फेर लेंगे। दूसरों की निंदा में तत्पर होंगे।

पराये धन को हड़प लेने की इच्छा मनुष्य के मन में घर कर लेगी। उनका मन परायी स्त्रियों में आसक्त होगा तथा वो दूसरे प्राणियों की हिंसा किया करेंगे। अपने शरीर को ही आत्मा समझेंगे।ये ऐसा युग होगा जिसमे मनुष्य गूढ़,नास्तिक और पशुबुद्धि रखनेवाले होंगे।वे माता-पिता से द्वेष रखेंगे।

ब्राह्मणों का चरित्र

ब्राह्मण लोभ रूपी ग्राह के ग्रास बन जायेंगे।वेद बेचकर जीविका चलाएंगे। धन का उपार्जन करने के लिए ही विद्या का अभ्यास करेंगे और मद में मोहित रहेंगे।

अपनी जाति के कर्म छोड़ देंगे। प्रायः दूसरों को ठगेंगे,तीनो काल की सन्ध्योपासना से दूर रहेंगे और ब्रह्म ज्ञान से शून्य होंगे।

क्षत्रियों का चरित्र

सभी क्षत्रिय भी स्वधर्म का त्याग करने वाले होंगे। उनमे शौर्य का अभाव होगा,वे कुत्सित चौर्यकर्म से जीविका चलाएंगे।

वैश्यों का चरित्र

वैश्य संस्कार-भ्रष्ट,स्वधर्मत्यागि,कुमार्गी,धनोपार्जन-परायण तथा नाप-तौल में अपनी कुत्सित वृति का परिचय देनेवाले होंगे। उनकी आकृति उज्जवल होगी अर्थात वो अपना कर्म धर्म छोड़कर उज्जवल वेश-भूषा से विभूषित हो व्यर्थ घूमेंगे।

शूद्र का चरित्र

अधिकतर लोगों के विचार धर्म के प्रतिकूल होंगे। वे कुटिल और द्विजनिंदक होंगे। यदि धनि हुए तो कुकर्म में लग जायेंगे।विद्वान वाद-विवाद करने वाले होंगे। स्वयं  को कुलीन मानकर चारों वर्णो के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित करेंगे। सभी वर्णो को अपने संपर्क से भ्रष्ट करेंगे। लोग अपनी अधिकार सिमा से बाहर जाकर द्विजोचित कर्मों का अनुष्ठान करने वाले होंगे।

स्त्रियों  का चरित्र

कलयुग की स्त्रियां प्रायः सदाचार से भ्रष्ट और पति का अपमान करनेवाली होगी। सास-ससुर से द्रोह करेगी। किसी का भय नहीं मानेंगी। मलिन भोजन करेगी। कुत्सित हाव-भाव में तत्पर रहेगी।  उनका शील स्वाभाव बहुत बुरा होगा और वे अपनी पति की सेवा से सदा ही विमुख रहेंगी।

पाठकों आज शिवपुराण में वर्णित ये सारी  बातें सच में घटित होती हुई दिखाई दे रही है। जबकि कलयुग ने अभी मात्र  5000 साल पुरे किये हैं। और इसे समाप्त होने में अभी लाखों वर्ष बांकी है। तो सोचिये कलयुग जब अपने चरम पर होगा तो हमारा समाज कैसा होगा।