सब्जियों के बढ़ते दामों पर सख्त हुए सीएम योगी, लिया बड़ा फैसला

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सुलतानपुर. जिले के गांवों और कस्बों में आलू-प्याज (Potato-Onion) की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं का हाजमा खराब कर दिया है। सब्जियों (Vegetables) के रोज बढ़ते भाव से लोगों के सामने सिर्फ दाल रोटी खाने की स्थिति बन गई है। मंडियों में हर दिन सब्जियों के भाव में उछाल जारी है। आलू, प्याज के बाद अब टमाटर (Tomato) और लाल हो रहा है। बुधवार को हुई बैठक में सीएमय योगी (CM Yogi) ने इसको लेकर सख्ती भी दिखाई है।

जिले में एक मात्र नवीन सब्जी मंडी अमहट में टमाटर का खुदरा दाम 75 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम की ऊंचाई पर पहुंच गया है। सब्जी मंडी आढ़तिया रवि प्रकाश और बबलू राइन के अनुसार टमाटर की मंडियों में मांग के अनुपात में आपूर्ति कम होने की वजह से टमाटर महंगा हो रहा है। आढ़तिया रवि प्रकाश ने बताया कि टमाटर के दाम तो जून से ही बढ़ना शुरू हो गया था। उन्होंने कहा कि अब तक टमाटर के दाम में उसकी किस्म के हिसाब से 45 से 50 रुपये किलो या फिर से 55 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहे थे। अब जो बढ़कर 75 से 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।

बारिश के टमाटर का उत्पादन प्रभावित-

सब्जी कारोबारी राशिद राइनी ने बताया कि टमाटर के खुदरा और थोक भावों में इसलिए तेजी आ रही है क्योंकि टमाटर उत्पादन क्षेत्रों से टमाटर की नयी फसल की आवक मंडियों में कम है। व्यापारियों का यह भी कहना है कि मानसून के दौरान भारी बारिश होने की वजह से सूबे में इस बार टमाटर का उत्पादन काफी प्रभावित हुआ है, जिसकी वजह से टमाटर की आवक कम हो गयी है।

लॉकडाउन का असर-

मंडी में टमाटर के कारोबारियों का कहना है कि लॉकडाउन के चरण में किसानों को टमाटर एक-दो रुपये किलो के भाव पर भी बेचना पड़ा था। टमाटर कारोबारियों ने कहा कि इस साल मानसूनी बारिश की वजह से आई अड़चनों और फसल को हुए नुकसान से नयी फसल की आवक प्रभावित हुई है। इस कारण टमाटर के खुदरा बिक्री दामों में अभी और तेजी आएगी।

सीएम योगी ने दिखाई सख्ती-

सब्जियों के बढ़ते दामों को लेकर सीएम योगी ने सख्ती दिखाई है। उन्होंने जनता को उचित मूल्य पर सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आलू, प्याज, टमाटर की जमाखोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि मूल्य समर्थन योजना के तहत धान की खरीद के लिए समयबद्ध ढंग से तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। धान क्रय केन्द्रों की संख्या में वृद्धि का आंकलन कर इसे लागू किया जाए।