धर्म

शबरी जयंती: पढ़िए उस भक्त की कथा जिसके झूठे बेर खाए थे स्वयं प्रभु श्रीराम

शबरी जयंती हर वर्ष फाल्गुन माह में मनाई जाती है। शबरी भगवान राम की जन्म से भक्त थी उसने जीवन पर्यंत भगवान राम की आराधना की, एक दिन वनवास काल के दौरान जब राम शबरी से मिलने पहुंचे तो वह भक्तिमय होकर उन्हें अपने जूठे बेर चख-चखकर देने लगी। इस वर्ष शबरी जयंती 25 फरवरी 2019 को मनाई जा रही है।

इसलिए महत्वपूर्ण है ये दिन
भगवान राम भी शबरी की भक्ति में इतने आत्मविभोर हो गए कि उसे इस बात का भान कराए बगैर कि वह उन्हें अपने जूठे बेर खिला रही है, उन बेरों को खाने लगे। भगवान राम से जुड़ाव होने के कारण ही शबरी जयंती को भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि यही वह दिन है जब भगवान राम ने शबरी के चखे जूठे बेर खाए थे।

शबरी की कथा
शबरी का नाम श्रमणा बताया जाता है। उसका जन्म एक शबरी जाति के परिवार में हुआ था। वह बाल्यकाल से ही भगवान राम अपार प्रेम करती थी, जिसकी वजह से ही वह उनका इंतजार करती रही। श्रमणा का पति आसुरी प्रवृत्ति का था, जिसकी वजह से लोग श्रमणा से भी दूर रहते थे। पति की प्रवृत्ति से व्यथित श्रमणा ने एक दिन उसके घर का त्याग कर दिया और मतंग ऋषि के आश्रम में आश्रय लिया। शबरी का पति जब यहां पहुंचा तो मतंग ऋषि से अभद्रता करने लगा। मतंग ऋषि ने उसे अपनी शक्ति से दंड दिया और बांध दिया, किंतु उसके क्षमा याचना के बाद उसे मुक्त कर दिया। जिसके बाद फिर वह कभी यहां नही आया।

यहां वह भगवान राम की भक्ति में लीन हो गई। जब प्रभु उसके पास माता जानकी को खोजते हुए पहुंचे तो भक्तिमय श्रमणा उन्हें अपने जूठे बेर खिलाने लगी। उनकी सेवा में रत उसे इस बात का भान ही नही रहा। शबरी की ये कथा रामायण में बड़े ही सुंदर अक्षरों में वर्णित है। भगवान राम ने शबरी को अनंतकाल तक अपनी भक्ति का आशीर्वाद दिया था।

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