विरोधी दल के नेता हो गए हैं काहिल, इसमें फेसबुक और ट्विटर का बहुत बड़ा योगदान

0
10

विरोधी दल के नेताओं को काहिल और कामचोर बनाने में फेसबुक और ट्विटर का बहुत बड़ा योगदान है।

चाहे राहुल गाँधी हों या अखिलेश यादव या नयी नयी खाताधारक मायावती और प्रियंका गाँधी , सरकार और सरकारी नीतियों और फैसलों का विरोध लक्ज़री एयरकंडिशन कमरों में बैठ कर 64 अक्षरों में ट्विटिया देने भर से कर देते हैं।

पहले यह विरोध सड़क पर , लाखों हज़ारो जनता के बीच मंच लगाकर किया जाता था तब जनता में सरकार के प्रति नाराज़गी और क्रोध पैदा होता था। सड़क पर उतर कर जनता के साथ कंधे से कंधा मिला कर लाठी खा कर होता था तब जनता मे ऐसे नेताओं के प्रति सहानुभूति होती थी।

दरअसल इसका एक कारण है कि राहुल , अखिलेश या आज के अन्य उत्तराधिकारी पुत्र विदेशी परिवेश में पले बढ़े और शिक्षित हैं जिनमें सड़क पर संघर्ष का माद्दा ही नही।

मायावती, काँशीराम की बोई फसल आजतक काट रहीं हैं तो अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव की तो राहुल-प्रियंका अपने तमाम पुर्वजों की लगाई फसल काट रहे हैं। और जनता के बीच जाकर उनके दुख दर्द , सरकारी फैसलों से उत्पन्न उनके कष्टों को सहलाने की बजाय ट्विटर ट्विटर या फेसबुक फेसबुक खेल कर इतिश्री कर ले रहे हैं।

देशी भाषा में यह काहिल और जाँगरचोर लोग हैं जो केवल चुनाव के कुछ दिन पहले ज़मीन पर सक्रिय होते हैं , अखिलेश यादव का बस चले तो वह चुनाव में भी ज़मीन पर ना उतरे बल्कि किसी से गठबंधन करके 2+2=5 की राजनीति के सहारे सरकार बनाने के सपने देखें।

इन नेताओं में सबसे काहिल , जाँगरचोर अखिलेश यादव हैं जो घर में बैठ कर जाने कौन सी राजनीति करना चाहते हैं , जाने कौन सा समाजवाद लाना चाहते हैं।

दरअसल , देश की राजनीति का यह दुर्भाग्य है कि विपक्ष के सारे नेता या तो उतराधिकारी हैं जो राजकुमार की तरह राजनैतिक व्यवहार करते हैं या फिर जो बचे हैं वह शमशान घाट के रास्ते में हैं।

राहुल गाँधी , प्रियंका गाँधी , आखिलेश यादव , गौरव गगोई , सुष्मिता देव , जयंत चौधरी , दीपेन्दर हुडा , सुप्रिया सुले , ज्योतिरादित्य सिंधिया , असदुद्दीन ओवैसी जैसे बड़े और ज़मीनी नेताओं के पुत्र हवाई हैं , और शरद पवार , मुलायम सिंह यादव , अजित सिंह , तरुण गगोई जैसे इनके पिता , थक हार कर जीवन के अंतिम चरण में हैं।

आश्चर्य की बात यह है कि नेतापुत्रों के अंदर इतनी सामर्थ्य और ताकत ही नहीं है कि वह अपनी खड़ी और जीवित पार्टी और उसमें शामिल जनाधार वाले नेताओं को अपने साथ जोड़े रखें , तो इसका कारण है इनकी सारी राजनीति फेसबुक और ट्विटर के सहारे चलना। यही कारण है इन पार्टियों में भगदड़ की। जिसे अपना राजनैतिक कैरियर जहाँ अधिक सुरक्षित लग रहा है उधर भाग रहा है और फिलहाल भाजपा सबकी पसंद है। क्युँकि भाजपा लोकसभा-19 का प्रचंड बहुमत पाकर भी चार दिन बाद से ही पूरे देश में सदस्यता अभियान छेड़े हुए है। और ये जाँगरचोर एयरकंडीशन मे बैठे सिर्फ ट्विटिया रहे हैं।

इन काहिल कामचोर नेतापुत्र पुत्रियों को या तो राजनीति से सन्यास लेकर दूसरों के लिए स्थान खाली कर देना चाहिए या फिर एक नेतापुत्र जगन मोहन रेड्डी से सबक लेकर उनके राजनैतिक तरीके का अनुसरण करना चाहिए।

जगन मोहन रेड्डी , काँग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसआर के बेटे हैं जो दुर्घटना में पिता की मृत्यु के बाद काँग्रेस और उसकी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से इतने अपमानित और प्रताणित हुए कि काँग्रेस से अलग होकर ज़मीन पर उतर गये और कड़ी मेहनत से ही अपने राज्य की जनता को अपना दिवाना बना लिया और आज आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।

क्या कोई विपक्षी नेतापुत्र ऐसा कर पाएगा ? माफ करिएगा , बिल्कुल नहीं। और भाजपा तथा मोदी की यही सबसे बड़ी ताकत है।

राजनीति केवल चुनाव के समय मंच से भाषण देकर नहीं होती , जनता के साथ सड़क पर उसके कंधे से कंधा मिलाकर की जाती है और यह कामचोर काहिल जाँगरचोर नेतापुत्र कभी नहीं कर पाएँगे।

ये लेख स्वतंत्र टीकाकार मोहम्मद जाहिद के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।