विजय से जब वो बोली- हां.. मैं एक वेश्या हूं लेकिन अभी तक कुंवारी हूं

0
42

हम सभी जातने हैं कि हमारे समाज में वैश्‍यावृति को क्‍या दर्जा दिया गया है। जो भी महिला वेश्या वृति में उतर जाती है हमारा समाज उसे अपनाने से इंकार कर देता है इस काम को समाज में सबसे निम्‍न दर्जा दिया गया है लेकिन आपको बता दें कि कुछ महिलायें इस धंधे में मज़बूरी वश आ जाती है तो कुछ जबरन धकेली जाती है। इन महिलाओं को लोग गंदी नजर से देखते हैं और साथ ही में इन्‍हें गालियां भी सुनने को मिलती है।

आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी कि इस व्‍यापार को बड़े पदों पर बैठे नेता और अभिनेता लोग ही चलाते है। कोई भी महिला जानबुझकर इस धंधे में नहीं आती है मजबूरन ही उसे ऐसा करना पड़ता है। एक बार अगर कोई औरत इस दलदल में फंस जाती है तो इसका यहां से बाहर निकल पाना मुश्किल होता है। आज हम आपको ऐसी ही एक लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं जो मजबूरन इस धंधे में आ गई थी। ये कहानी एक लड़‍की सीमा (बदला हुआ नाम ) की है। वो होस्टल में रहकर पढाई कर रही थी सीमा कभी अपने घर नहीं गयी थी।

सीमा एक लड़के को बहुत प्यार करती थी जिसके बाद सीमा की जॉब भी लग गयी थी। सीमा ने अपनी मां से वादा किया की वो अपने गाँव घुमने आयेगी। जिसके बाद छुट्टियां मिलते ही वो अपनी मां के साथ गाँव चली आती है जैसे ही वो अपने गाँव पहुचती है तो ऑटो वाला पूछता है की सीमा बिटिया को भी इस धंधे में डालने लेके आई हो।

मां कहती है, फ़ालतू की बकवास मत करो अपने काम से काम रखा। मां सामान लेने जैसे ही दुकान पर जाती है दुकानदार बोलता है- बिटिया को यहां क्यूँ लाई हो, इसे अपने धंधे से दूर ही रखना। सीमा माँ से बोली- माँ मैंने जो सुना है क्या वो सही है?

मां ने सीमा को गले लगते हुए कहा की वो एक वेश्या है। बेटी मेरा भी घर था तेरे पापा तेरी दादी दादा के साथ हरिद्वार गंगा मैया के दर्शन को गए थे एक रोड एक्सीडेंट में सबकी मृत्यु हो गई थी, तब तू मेरे पेट में थी, इसलिए तेरे पापा मुझे अपने साथ नहीं ले गए थे।

काश मैं भी चली जाती उनके साथ, तो आज इतने दुःख ना झेलने पढते। सीमा ने कहा तुमने मेरे लिए कितने दुःख झेले हैं, मुझे इस दलदल से दूर रखा, मेरी जिन्दगी बना दी और खुद इस आग में जलतीं रही। अब आपकी बेटी सक्षम हो गई है अपनी माँ का ख्याल रखने के लिए।

सीमा जिस लड़के से प्यार करती थी उसका नाम विजय था। उन दोनों की शादी की बात चलने वाली थी लेकिन विजय के बाप ने जैसे ही उसकी मां को देखा उसने कहा की वो विजय की शादी सीमा से नहीं कर सकता क्योंकि उसकी मां एक वेश्या है। मां ने कहा कि वैश्या शब्द तो फिर भी अच्छा है तुम अपने घिनौने मुंह से इस नाम को अपवित्र ना करो। वैश्या शब्द इस समाज के लिए और तुम्हारे लिए एक गाली अवश्य होगा, लेकिन ये हमारे लिए समय की एक कैद थी, एक अवस्था थी।

सीमा को अभी भी लग रहा था कि विजय उससे सच्चा प्यार करता है इसलिए वो उसके फोन का इंतजार कर रही थी तभी थोड़ी देर बाद फ़ोन की घंटी बजी। फ़ोन विजय का था, विजय ने फ़ोन पर कहा की सीमा तुम्हारा खानदानी पेशा मुझे पता चल गया है। तुम एक वेश्या हो मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता हूँ.. सीमा ने कहा अगर तुम कहते हो तो, हाँ मैं एक वैश्या हूँ, हाँ मेरी मां वैश्या थी, हाँ मैं वैश्या की बेटी हूँ, लेकिन मैं एक देवी की तरह पवित्र हूं, विश्वास कीजिए मैं अभी तक कुंवारी हूँ।