लद्दाख पर चीन की निगाह की 3 अलौकिक वजह, यहीं है एलियंस का हवाई अड्डा !

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लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ जारी विवाद में भारत की चौतरफा रणनीति का असर दिखाई देने लगा है। 5 मई से ही आक्रामक रुख अपना रही चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) बीते तीन-चार दिनों से इलाके में कुछ विशेष हलचल नहीं कर रही है और शांत है। सूत्रों के मुताबिक, पीएलए ने उन इलाकों से पीछे हटना भी शुरू कर दिया है जहां उसने पिछले कुछ दिनों में अतिक्रमण किया था। लेकिन सवाल ये है कि वो यहां आया ही क्यों था। ज्यादातर लोग इसे चीन की विस्तारवादी नीति का हिस्सा मानते है, कुछ लोग इसे कोरोना से दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश बता रहे हैं, वहीं काफी लोग ऐसे भी हैं जो इस सबके पीछे लद्दाख में छुपे उन 3 रहस्यों को मान रहे हैं, जो पूरी दुनिया को बदलने की काबिलियत रखते हैं।

एलियंस का हवाई अड्डा

भारत-चीन सीमा एक ऐसा हवाई अड्डा होने की बात कही जाती है जहां अक्‍सर एलियंस आया करते हैं। सीमा का यह हिस्‍सा एलियंस का हॉट-स्‍पॉट माना जाता है। यहां अक्‍सर एलियंस और यूएफओ के दिखने की बात कही जाती है। सीमा पर कोंग्‍का ला दर्रा एक रहस्‍यमयी स्‍थान है, जहां पर एलियंस देखे जाने का दावा किया जाता है। भारत इसे लद्दाख का हिस्‍सा मानता है तो वहीं चीन इसे हिमालय के अक्‍साई का क्षेत्र मानकर इस पर अपना हक जमाता है। बहरहाल यहां किसी भी देश की सेना की मौजूदगी नहीं है। इस कारण यह क्षेत्र अक्‍सर ही विवाद का विषय बना रहता है। लेकिन यहां एलियंस के आने-जाने का सिलसिला बना रहता है।

मैग्‍नेटिक हिल


इसे जादू वाली पहाड़ी कही जाए तो कोई अतिश्‍योक्ति नहीं होगी। जी हां लद्दाख क्षेत्र में लेह के पास एक पहाड़ी है, जो ‘मैग्नेटिक हिल’ के नाम से मशहूर है। यहां के बारे में कहा जाता है कि ऐसी गजब शक्ति मौजूद है जो कि चीजों को अपनी ओर खींचती है। यहां पर गाड़ी 20 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ऊपर की ओर जाती हैं और नीचे भी आती है। और तो और मैग्‍नेटिक हिल के ऊपर से गुजरते वक्‍त विमान भी इस चुंबकीय शक्ति के कारण झटका खा जाते हैं। कई पायलट्स ऐसा बता चुके हैं। गर आप इस पहाड़ी पर गाड़ी न्यूट्रल में खड़ी कर दें तब भी वह जस का तस खड़ी रहेगी। जबकि किसी दूसरी पहाड़ी पर ऐसा किया तो आपकी गाड़ी तेजी से नीचे उतरने लगेगी।

पैंगोंग झील


लद्दाख में फैली यह झील 4500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 135 किमी लंबी यह झील 604 स्‍क्‍वायर किमी में फैली है। खारे पानी की यह झील सर्दियों में पूरी तरह से जमकर एकदम पत्‍थर जैसी हो जाती है। माना जाता है कि इस विशाल झील का 45 किमी हिस्‍सा भारत यानी लद्दाख में स्थित है। जबकि इसका 90 किमी हिस्‍सा तिब्‍बत में पड़ता है। माना जाता है कि यह झील दिन में कई बार अपना रंग बदलती है, जिसके पीछे की वजह पानी में आयरन की मौजूदगी बताई जाती है। वहीं पौराणिक मान्‍यताएं यह कहती हैं कि यह झील यक्ष राज कुबेर का मुख्‍य स्‍थान है। भगवान कुबेर की दिव्‍य नगरी इसी झील के आसपास कहीं स्थित है। इसके बारे में रामायण और महाभारत में भी बताया गया है।