रावण संहिता: सावन में त्रिकोण का ये आसान उपाय करें, कर्जा उतरेगा और धन बरसेगा

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पवित्र सावन मास भगवन भोले की आरधना और भक्ति का माह कहलाता है। मान्यता है कि इस मास स्वयं शिव शम्भू धरती लोक पर आकर अपने भक्तो का कल्याण करते है। इसी प्रकार धर्म शास्त्रों के आधार पर बताया गया है कि सावन में शिव जी की पूजा के साथ-साथ जो जातक इनसे जुड़ी खास उपाय करता है उसके जीवन की आधी से ज्यादा समस्याएं खत्म हो जाती है। ऐसा ही एक उपाय आज हम आपके लिए लाये है रावण सहिंता से जिसमे बताया गया है कि कैसे शिव भक्त अपने कर्जो से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

व्यक्ति के जीवन में कभी कभी ऐसी परिस्थिति बन जाती है जिसके चलते न चाहते हुए भी कि से पैसा कर्ज लेना पड़ता है, व्यक्ति कर्ज ले तो लेता पर उसे चुकाना किसी किसी के लिए बड़ा ही कठिन होता है। अगर आप भी कर्ज से परेशान है तो सावन मास में एक बार इस लाल त्रिकोण के उपाय को एक बार करके देखें। बता दें ये उपाय रावण संहिता में वर्णित हैं। बल्कि इसमें दिए गए उपाय इतने प्रभावशाली बताएं गएं हैं इसे करने के बाद जातक को शीघ्र ही कर्ज़ से मुक्ति मिलने लगती है।

रावण संहिता उपाय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कर्ज़ मुक्ति का मुख्य कारक मंगल ग्रह है। जिसे भूमि, भवन, संपत्ति और कर्ज़ मुक्ति का कारक माना जाता है। मंगल जिस राशि को प्रभावित करता है, उस मनुष्य की उल्टी गिनती सुरु हो जाती है। यानी जीवन में दुःख परेशानी व शंकट के बादल छाने लगते है। मंगल ग्रह का यंत्र त्रिकोण आकार का होता है, जिसे तांबे पर बनाया जाता है, इस यंत्र की पूजा सावन मास में विधि विधान से करने से मंगल के दोष से राहत मिलने के साथ कर्ज भी तेजी से उतरने लगता है। रावण संहिता में लाल त्रिकोण का अद्भूत उपाय बताया गया है।

सावन मास में लाल त्रिकोण के इस उपाय को करने से अचावन धन आवक बढ़ने लगती है। एक भोजपत्र पर केसर की स्याही से मोटी लकीर वाला त्रिकोण बनाएं। त्रिकोण बनाने में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि त्रिकोण का एक नुकीला हिस्सा ऊपर की ओर हो और दो कोण नीचे की ओर। इसे सीधे पिरामिड की तरह बनाना है। अब इस त्रिकोण के बिलकुल मध्य में एक छोटा सा वृत्त बनाएं फिर इस वृत्त के बीचोंबीच एक बिंदी लगाएं।

ज्योतिषचार्यों के अनुसार, यह पूरा चित्र केसर की स्याही से ही बनाना है, अब इस यंत्र के सामने बैठकर एक माला “ऊँ भौमाय नमः” मंत्र की जप करें। मंत्र जप पूरा होने के बाद भोजपत्र को धीरे-धीरे मोड़कर एक चांदी के ताबीज में भरकर लाल धागे में बांधकर अपने गले या दाहिनी भुजा पर बांध लें। माना जाता है इस उपाय के बाद अचानक धन आवक में वृद्धि होने लगेगी साथ पुराना से पुराना कर्ज से कुछ ही दिनों में छुटकारा मिल जायेगा। इसे लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपने पर्स में भी रखा जा सकता है।

रावण सहिंता विस्तार

रावण भगवान श‌िव का परम भक्त होने के साथ ही महान तांत्र‌िक और ज्योत‌िषी भी था। रावण की तंत्र व‌िद्या और ज्योत‌िष का सार रावण संह‌िता में म‌िलता है। इसमें रावण ने जहां कई ज्योत‌िषीय रहस्य खोले हैं वहीं कुछ ऐसे उपाय भी बताए ज‌िनसे क‌िस्मत के ताले खोलकर देवी लक्ष्मी को धन देने के ल‌िए मनाया जा सकता है।

धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सात अध्यायों वाला रावण संहिता अद्वितीय व दुर्लभ ग्रंथ है। संस्कृत भाषा में रचित ग्रंथ के अध्याय एक में मंत्र, तंत्र का उल्लेख है, जबकि अध्याय दो में कुमार तंत्र (आयुर्वेद के रहस्य) की चर्चा की गई है। अध्याय तीन से पांच तक ज्योतिष व उसके रहस्य के बारे में बताया गया है। इसी तरह ग्रंथ के अध्याय छह में कवच (शक्ति व अर्जन) तथा अध्याय सात में यंत्र का उल्लेख है।