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योगी जी, जब सारे दंगाई ख़ुद ‘सत्ता’ में हैं तो फिर ‘दंगा’ कौन करेगा?

मार्च में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दो साल पूरे होने वाले हैं। इस मौके पर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दंगे की घटनाओं को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके अबतक के शासनकाल में सूबे में कोई दंगा नहीं हुआ।

उन्होंने गुरुवार को एक ट्वीट कर लिखा, “मार्च में मेरे शासनकाल के दो वर्ष पूरे होंगे। मेरे अब तक के शासन में, कोई दंगा नहीं हुआ है”। हालांकि उनका यह दावा आंकड़ों के आधार पर बेबुनियाद है।

द वायर में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने पिछले साल 11 दिसंबर 2018 को लोकसभा में बताया था कि साल 2017 में उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक हिंसा की कुल 195 घटनाएं हुईं।

इन हिंसक घटनाओं में 44 लोगों की मौत हो गई और 542 लोग घायल हुए। अहीर ने सदन में लिखित जवाब में यह भी बताया था कि साल 2014 के मुकाबले साल 2017 में लगभग 32 फीसदी अधिक सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुईं।

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 में पूरे भारत में कुल 822 सांप्रदायिक घटनाएं हुईं थी इसमें से 195 मामले उत्तर प्रदेश के हैं। यानी साल 2017 में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में यूपी की 23 फीसदी की हिस्सेदारी थी, जो किसी भी राज्य से सबसे ज़्यादा थी।

हो सकता है कि योगी आदित्यनाथ इन आंकड़ों से वाकिफ़ न हों, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वह ख़बरें भी नहीं देखते? शब्बीरपुर, बुलंदशहर, सहारनपुर, कासगंज में हुई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं ने तो ख़ूब सुर्खियां बटोरी थीं। सीएम योगी कैसे इतनी बड़ी घटनाओं को नज़रअंदाज़ कर इस तरह का बयान दे सकते हैं?

सीएम योगी के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर उनका जमकर मज़ाक बनाया जा रहा है। पत्रकार साक्षी जोशी ने भी इसपर प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “जी जरूर। दंगों की आपकी अपनी परिभाषा के अनुसार कोई दंगा नहीं हुआ”।

इसी तरह से समाजवादी पार्टी की नेता प्रीति चौबे ने भी योगी के दावेपर तंज कसा है.

 

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