यूपी के उस जांबाज अफसर की असली कहानी, जो आप सबने ‘भौकाल’ में देखी

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हर शहर अपने आपमें अपनी पहचान रखता है जिसमें आगरा जूते के लिए, बरेली सुरमे के लिए तो मुजफ्फरनगर किस चीज के लिए प्रसिद्ध है यह सवाल अगर में आपसे आज से डेढ़ दशक पहले पूछता तो निश्चित रूप से आपका जबाब होता, क्राइम। यहां बदमाशों का खौफ ऐसा था कि मुजफ्फरनगर के माथे पर अपराध की राजधानी का बदनुमा दाग लग गया था। प्रति व्यक्ति आय में उस समय देशभर में अव्वल मुजफ्फरनगर का यह हाल था कि लोग यहां आने से भी खौफ खाते थे। अपहरण और संगठित अपराध यहां की पहचान बन गए थे। हत्या, लूट और डकैती की ताबड़तोड़ वारदातें हो रही थीं।

तभी वहां ‘सुपर कॉप’ बन कर उभरे आईपीएस नवनीत सिकेरा की पोस्टिंग हुई जिसके बाद शुरू हुआ बदमाशों के खात्मे का सिलसिला। जिसमें सिकेरा के नेतृत्व में मुजफ्फरनगर पुलिस ने बदमाशों पर सख्ती से नकेल कसना शुरू कर दी और कुछ नामी बदमाशों को तो सीधे ऊपर का रास्ता ही दिखा दिया। रियल लाइफ के हीरो आईपीएस नवनीत सिकेरा की एंट्री मुजफ्फरनगर में रील लाइफ के सिंघम की तरह हुई और देखते ही देखते क्राइम कैपिटल कहे जाने वाला मुजफ्फरनगर शांति और अमन की ओर बढ़ने लगा।

उस दौर में हुए बदमाशों के खात्मे की कहानी को वेब सीरीज भौकाल में फिल्म अभिनेता और निर्माता हरमन बवेजा ने बेहद रोचक ढंग से दिखाया है। जिसमें फिल्म की पटकथा लिखने वाले डॉ अरुण शर्मा ने आईपीएस नवनीत सिकेरा की जांबाजी का बड़े ही सजीव ढंग से चित्रण किया है।

ऐसा नहीं है कि किसी जांबाज पुलिस ऑफिसर पर पहले कोई फिल्म नहीं बनी लेकिन भौकाल उन सबसे हटकर है जो आईपीएस नवनीत सिकेरा की रियल लाइफ के काफी नज़दीक महसूस होती है फिल्म में उनके द्वारा किये गए अन्कॉउंटर और गेंग के खात्मे के दृश्य सिकेरा की बहादुरी को प्रदर्शित करते हैं।

इस वेब सीरीज में नवनीत सिकेरा के किरदार का नाम नवीन सिकेरा है, कुछ अन्य किरदार के नाम भी बदले गए हैं। वेब सीरीज की शुरुआत में ही मेरठ में तैनात आईजी नवीन सिकेरा को मुजफ्फरनगर एसएसपी के पद पर तैनाती का पत्र देते हुए कहते हैं कि इस देश में दो राजधानी है, एक दिल्ली जहां कानून बनाए जाते हैं, दूसरी मुजफ्फरनगर क्राइम कैपिटल जहां कानून तोड़े जाते हैं। दरअसल, आईपीएस नवनीत सिकेरा ने मुजफ्फरनगर जिले में 15 माह के अपने कार्यकाल में बड़े- बड़े इनामी और शातिर अपराधियों को मार गिराया था।

उन्होंने यहां करीब 55 बड़े अपराधियों का एनकाउंटर किया था। आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग करने वाले सिकेरा ने तब सर्विलांस के जरिए अपराधियों का खात्मा कर जिले के लोगों को बड़ी राहत दिलाई थी। थानाभवन में बिट्टू कैल का एनकाउंटर करने पर तत्कालीन डीआईजी चंद्रिका राय ने उन्हें सिकेरा के बजाए नवनीत ‘शिकारी’ कह कर संबोधित किया था। वर्तमान में नवनीत सिकेरा आईजी पुलिस आवास निगम हैं। उनकी टीम में शामिल रहे तत्कालीन भोपा एसओ विनोद सिरोही अब डीएसपी हैं और एसटीएफ में तैनात हैं।

छपार थाना क्षेत्र के गांव बरला निवासी शौकीन के अलावा थानाभवन क्षेत्र के गांव कैल शिकारपुर निवासी बिट्टू और नीटू ने आपराधिक वारदात से जिले में दहशत फैलाई थी। शौकीन ने गांव के ही दो लोगों की हत्या के अलावा अपहरण और हत्या की कई वारदातों को अंजाम दिया था, जिसके बाद शौकीन का एनकाउंटर हुआ था। इसी तरह नीटू और बिट्टू ने भी ताबड़तोड़ वारदाते की थीं। एक मामले में तो उन्होंने पुलिस पर हमला कर कारबाइन तक भी लूट ली थी। इनको भी सिकेरा ने मुठभेड़ में मार गिराया था।

मुजफ्फरनगर में 6 सितंबर 2003 से लेकर एक दिसंबर 2004 तक नवनीत सिकेरा एसएसपी रहे। इस दौरान उन्होंने 55 शातिर और इनामी बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर किया। इनमें 20 हजार का इनामी शौकीन, पूर्वांचल का शातिर शैलेश पाठक, बिजनौर का छोटा नवाब, रोहताश गुर्जर, मेरठ का शातिर अंजार, पुष्पेंद्र, संदीप उर्फ नीटू कैल, नरेंद्र उर्फ बिट्टू कैल आदि कुख्यात बदमाश शामिल थे।

इस प्रकार मुजफ्फरनगर से आतंक का खत्मा हुआ और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचने वाले आईपीएस नवनीत सिकेरा के प्रयासों से लोगों ने राहत की साँस ली।