यूपी के इतिहास का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा, एक ही पैन नंबर पर सरकार नौकरी कर रहे 2500 टीचर

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लखनऊ. यूपी के परिषदीय स्कूलों में एक ही पैन नंबर पर नौकरी कर रहे ढाई हजार से ज्यादा टीचरों की जांच शासन ने एसटीएफ को दे दी है। दरअसल बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में शिक्षकों का डाटा मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर अपलोड होने के बाद प्रदेश में अब तक ढाई हजार ऐसे टीचर सामने आए हैं, जिन्होंने नौकरी मिलने के बाद पैन नंबर बदला है। जबकि सौ से ज्यादा ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें दो टीचरों का वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा था। जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने इस पूरे मामले की जांच के लिए गृह विभाग को पत्र लिखा। फिर गृह विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर एसटीएफ को इस फर्जीवाड़े की जांच सौंप दी। बेसिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार इस समय खुद जांच की समीक्षा कर रही हैं।

ऐसे हुआ खुलासा

दरअसल विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने पिछले साल मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप को लागू किया था। उन्होंने हर शिक्षक को अपना डाटा प्रेरणा एप और मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। पहले 30 जून तक पोर्टल पर डाटा अपलोड कर उसका सत्यापन करना था, जिसकी अवधि 15 जुलाई तक बढ़ाई गई है। मानव संपदा पोर्टल और प्रेरणा एप पर डाटा अपलोड कराने के दौरान ही सामने आया कि 2008 से 2019 के बीच प्रदेश के करीब ढाई हजार शिक्षकों ने अपना पैन नंबर बदला है। मतलब जो पैन नंबर इन शिक्षकों ने नियुक्ति के समय दिया था वह उसी नाम के किसी दूसरे शिक्षक का भी निकला। सूत्रों के मुताबिक मानव संपदा पोर्टल पर 15 जुलाई तक डाटा सत्यापन होने के बाद ऐसे और भी कई मामले सामने आ सकते हैं। इनकी संख्या अभी चार से पांच हजार तक पहुंच सकती है।

अभी मिलेंगे और फर्जी शिक्षक

बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पहले 10वीं, 12वीं, स्नातक, बीटीसी, बीएड और अन्य कोर्स के प्राप्तांक से तैयार मैरिट के आधार पर शिक्षक भर्ती होती थी। ऐसे में स्कूलों में फर्जी शिक्षकों को भर्ती कराने वाला गिरोह खासा सक्रिय था। गिरोह विभाग में पहले से काम कर रहे शिक्षकों के दस्तावेज और प्रमाण पत्रों के सहारे फर्जी शिक्षक नियुक्त कराते थे। उसमें केवल फोटो ही फर्जी शिक्षक की लगती थी, जबकि अंक तालिकाएं, प्रमाण पत्र, डिग्री, पैन कार्ड नंबर पहले से कार्यरत शिक्षक का ही होता था

यहा तक कि कई मामलों में दो शिक्षकों का वेतन भी एक ही बैंक खाते में जाता था। दोनों शिक्षक या तो एक ही जिले में कार्यरत हैं या किसी दूसरे जिले में लेकिन वेतन एक ही बैंक खाते में जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों में से एक शिक्षक फर्जी हैं, लेकिन वह वह असली शिक्षक की मिलीभगत से यह कारनामा कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक 1995 से लेकर 2010 तक हुई लगभग सभी सहायक अध्यापकों की भर्ती में ऐसे तमाम मामले सामने आएंगे।