मौत का दूसरा नाम बन गया था ये तेंदुआ, इसके आतंक पर बड़ी मुश्किल से लगा ताला

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लखीमपुर-खीरी । धौराहरा रेंज में पिछले एक महीने से 15 गांव में आतंक का पर्याय बने तेंदुए को वन विभाग ने सोमवार की रात में पकड़ लिया। यह जानकारी मंगलवार की दोपहर वन विभाग ने मीडिया से साझा की। पिंजरे में कैद हुए तेंदुए ने पिछले एक माह में 4 मवेशियों सहित एक बच्चे को अपना निवाला बनाया है।

लखीमपुर खीरी के धौरहरा रेंज के ओझापुरवा सहित तकरीबन 15 गांव में पिछले एक महीने से तेंदुए ने आतंक मचा रखा था। आठ साल के एक बच्चे समेत कई मवेशियों को ये तेंदुआ अपना निवाला बना चुका है। धौराहरा रेंज के वन्य कर्मियों ने तेंदुए को पकड़ने के लिए डब्ल्यूटीआई की मदद से इलाके में पिंजरा लगाया था।

यह पिंजरा रेंज के बैलागढ़ी गांव के पास एक गन्ने के खेत में लगाया गया था। वन कर्मियों ने पिंजरे को प्राकृतिक रूप देने के लिए पूरी तरीके से घास-फूस से ढक दिया था। सोमवार देर रात लगभग दो बजे शिकार की तलाश में पहुंचे तेंदुए ने पिंजरे के अंदर बंधी बकरी को देखा और उसे अपना निवाला बनाने के लिए पिंजरे में घुस गया।

तेंदुए के अंदर घुसते ही पिंजरे का ऑटोमेटिक लॉक लगने की से पिंजरा बंद हो गया। जिसके बाद पिंजरे के अंदर फंसा तेंदुआ जोर-जोर से दहाड़ लगाने लगा। तेंदुए की आवाज सुनकर नाइट वाच में लगे वन्य विभाग के लोगों को पिजरे में तेंदुए के फंसने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी।

दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन के डिपो प्रभारी अनिल पटेल ने बताया कि पहले तेंदुए का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। उसके बाद ही यह तय किया जाएगा कि तेंदुए को दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा जाएगा या फिर लखनऊ चिड़ियाघर में भेजा जाएगा।

अगर तेंदुआ नरभक्षी हो गया होगा तो ऐसी दशा में उसे जंगल में वापस नहीं छोड़ा जा सकता क्योंकि फिर उसका खतरा बना रहेगा। ऐसे में फिर उसे किसी चिड़ियाघर में रखा जाना ही उचित होगा। फिलहाल आतंक का पर्याय बने तेंदुए के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।