उत्तर प्रदेशख़बर

मोदी ने खेला आरक्षण का मास्टरकार्ड, यूपी में होगा इतना बड़ा असर

लोकसभा चुनाव से चंद महीने पहले मोदी सरकार ने बड़ा दांव चलते हुए आर्थिक रुप से पिछड़े सर्वणों का आरक्षण देने का फैसला किया है. मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के लिए संविधान संसोधन का फैसला किया है. सरकार के फैसले के मुताबिक गरीब सवर्णों को नौकरी और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की जाएगी और आरक्षण मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बिना किसी छेड़छाड़ के दी जाएगी.

सरकार के इस फैसले का मतलब ये हुआ कि जनरल कैटेगरी में जो भी लोग आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं वो सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण का लाभ ले पाएंगे. मोदी सरकार के इस फैसले से पहले सविधान में सवर्णों को किसी भी तरह के आरक्षण नहीं मिलता था.

दरअसल तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव परिणामों से सबक लेते हुए मोदी सरकार ने आम चुनाव से पहले सवर्णों को रिझाने का दांव खेला है. गौरतलब है कि तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में बड़ी संख्या में सवर्ण मतदाताओं ने बीजेपी के खिलाफ नोटा का प्रयोग किया, जिसके कारण बीजेपी को सत्ता से बेदखल होना पड़ा.

माना जा रहा है कि मोदी सरकार के इस फैसले का उत्तर प्रदेश की सियासत पर बड़ा असर पड़ेगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आम चुनाव से ठीक पहले सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने की बात कहकर भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा गेम खेल दिया है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है आरक्षण की घोषणा के जरिये बीजेपी सरकार उन सवर्णों को खुश करना चाहती है, जो कहीं न कहीं एससी-एसटी एक्ट में संशोधन से नाराज हैं. इसके अलावा संभावित महागठबंधन की चुनौतियों से भी निपटने के लिए बीजेपी अपनी पार्टी के कोर वोटरों छिटकने नहीं देना चाहती. इसके लिए बीजेपी ने सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण की बात कही है.

Back to top button