मलेरिया में दी जाती जो दवा, उससे कोरोना का खात्मा करेगा अमेरिका !

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अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर (FDA) ने कोरोना वायरस (COVID-19) की दवा को मंजूरी दे दी है. USFDA की इस हरी झंडी के बाद मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दो दवाओं से कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित मरीजों का इलाज हो सकेगा. एफडीए ने कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए आपातकाल में मलेरिया की दो दवाओं के सीमित प्रयोग को इसलिए मंजूरी दी है क्योंकि कोविड-19 की अभी तक कोई दवा या वैक्सीन नहीं खोजी गई है.

अमेरिका के हेल्थ डिपार्टमेंट ने एक स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि क्लोरोक्वीन (Chloroquine) और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) से कोरोनावायरस से संक्रमित बच्चे और युवाओं का इलाज हो सकता है. लेकिन, तब जब क्लीनिकल ट्रायल उपलब्ध या मुमकिन न हो. मतलब ये कि अमेरिका में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ने की आशंका को देखते हुए USFDA ने मरीजों के इलाज को आपात स्थिति में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के सीमित इस्तेमाल की मंजूरी दी है.

अमेरिका हेल्थ डिपार्टमेंट का यह स्टेटमेंट FDA के एमरजेंसी यूज ऑथोराइजेशन (EUA) इश्यू करने के बाद आया है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, COVID-19 से जुड़ी किसी भी दवा को पहली बार EUA दिया गया है. क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है. लैब में जांच के दौरान यह कोरोना वायरस से भी लड़ने में मददगार बताई जा रही है.

रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये दवाएं अस्पताल में भर्ती COVID-19 के मरीजों का इलाज करने में कुछ हद तक कारगार साबित हुई है. हालांकि, वैज्ञानिक रूप से प्रमाण के लिए क्लीनिकल टेस्ट जरूरी है. EUA के तहत हेल्थकेयर प्रोवाइडर और मरीजों को फैक्टशीट दी जानी चाहिए, जिसमें इसके जोखिम और मेडिकेशन का पूरा प्रोसेस बताया गया हो.

अमेरिका हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज ने माना कि उसने अपनी फार्मा कंपनी नोवारटिस (Novartis) से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन सल्फेट की 3 करोड़ दवाएं मंगाई हैं. साथ ही 10 लाख क्लोरोक्वीन फॉस्फेट को Bayer फार्मा कंपनी से मंगाया गया है. क्लीनिकल ट्रायल और अस्पतालों में इन्हीं दवाओं का इस्तेमाल होगा. इसके अलावा ये कंपनी या दूसरी कंपनियां भी अतिरिक्त दवाएं दान कर सकती है

फिलहाल, कोरोना वायरस से लिए कोई दवा नहीं बनी है. जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक, पिछले चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस के अभी तक दुनियाभर में 8 लाख केस सामने आए हैं. इसमें से 38 हजार लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 1 लाख 70 हजार के आसपास लोगों में रिकवरी देखी गई है.