उत्तर प्रदेश

ब्याज के लिए अब किसी का खून नहीं चूस सकेंगे साहूकार, फुल ऑन ऐक्शन में योगी सरकार

लखनऊ
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘सवा सेर गेहूं’ के नायक शंकर की तरह जरूरतमंद अब कर्ज के लिए साहूकारों के जाल में नहीं फंसेंगे। सरकार ने साहूकारी व्यवस्था खत्म करने की तैयारी तेज कर दी है। जिम्मेदारों के मुताबिक, बैंकों से कर्ज लेने की प्रणाली आसान होने के बावजूद साहूकार ज्यादा ब्याज पर रकम देकर गरीबों का शोषण कर रहे हैं।

ऐसे में राजस्व विभाग ने सभी जिलों से इस व्यवस्था की जरूरत पर रिपोर्ट मांगी है। लखनऊ जिला प्रशासन ने यह व्यवस्था को समाप्त करने की रिपोर्ट भेजी है। अफसरों ने रिपोर्ट में कहा है कि जब बैंकों में जीरो बैलेंस पर अकाउंट खुल रहा है तो साहूकारी व्यवस्था की कोई आवश्यकता नहीं है।

2552 साहूकारों के लाइसेंस निरस्त
साहूकारी अधिनियम के तहत राजधानी में करीब 2600 साहूकारों को लाइसेंस दिए गए थे। जिला प्रशासन ने पिछले डेढ़ साल में रिनिवल की प्रक्रिया रोकने के साथ 2552 लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। मौजूदा समय में सिर्फ 48 साहूकारों के पास लाइसेंस हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर की रिनिवल की फाइल रोक दी गई है। ऐसे में महज 18 साहूकार ही लेन-देन करने की स्थिति में हैं।

साहूकारी व्यवस्था रिनिवल के नोडल अधिकारी एडीएम प्रशासन एपी सिंह का कहना है कि बैंकिंग व्यवस्था इतनी आसान हो गई है कि साहूकारों की जरूरत नहीं है। इसी कारण लाइसेंस निरस्त करने के साथ रिनिवल बंद कर दिया गया है।

17% तक ब्याज लेते हैं साहूकार

उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम 1976 के मुताबिक, साहूकारी के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। यह लाइसेंस एक साल के लिए मिलता है और हर साल इसका नवीनीकरण होता है। इसके तहत साहूकार प्रतिभूत ऋण यानी कोई वस्तु गिरवी रखकर लिए गए ऋण पर 14% वार्षिक ब्याज ले सकते हैं।

वहीं, अप्रतिभूत पर 17 फीसदी वार्षिक ब्याज ले सकते हैं। वहीं, कृषि के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए पांच हजार रुपये से अधिक के ऋण पर आपसी सहमति से ब्याज तय किया जा सकता है।

2 वर्ष तक हो सकती है सजा
लाइसेंस समाप्त होने और नवीनीकरण के बगैर अवैध रूप से साहूकारी करने वाले और गरीबों को शोषित करने वालों के विरुद्घ साहूकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए न्यायालय में मुकदमा भी चलाया जा सकता है। इसमें अधिकतम दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान भी है।

पुलिस भी चला चुकी अभियान
साहूकारी प्रथा का मकड़जाल तोड़ने के लिए पुलिस भी कई बार अभियान चला चुकी है। पूर्व डीजीपी जावीद अहमद ने उत्पीड़न करने वाले साहूकारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियान चलाया था।

वहीं, पूर्व एसएसपी आशुतोष पाण्डेय ने भी एक माफिया के करीबी साहूकार से हजरतगंज के एक दुकानदार समेत कई लोगों को बचाया था। 

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