बीजेपी ने सिंधिया के साथ ही पायलट को डाला था दाना, लेकिन तब उनको वो ऑफर पसंद नहीं आया !

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जोधपुर/जयपुर. राजस्थान में सियासी घमासान जारी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी कुर्सी बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। पायलट खेमे की ओर से दावा किया जा रहा है कि उनके समर्थन में 30 विधायक हैं। इधर, गहलोत खेमे ने 100 से अधिक विधायकों के समर्थन का दावा किया है।

अब इस पूरे प्रकरण को ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, जब सिंधिया भाजपा में शामिल हुए थे तब पायलट से भी संपर्क किया गया था। भाजपा ने उन्हें भी अपने पाले में करने की कोशिश की थी लेकिन बात नहीं बना पाई थी।

भाजपा ने दिया था जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल का ऑफर

भाजपा ने पायलट को जम्मू-कश्मीर भेजने का ऑफर दिया था। वहां पर अहम जिम्मेदारी देने की बात भी कही थी। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने पायलट को जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल का ऑफर दिया था। इसके पीछे सोच यह थी कि पायलट वहां के पूर्व सीएम फारुक अब्दुला के दामाद हैं, इसलिए वे वहां स्थिति को संभाल लेंगे। हालांकि, तब पायलट ने राजस्थान छोड़ने से इंकार कर दिया था। फिर भी भाजपा ने लगातार कोशिश करती रही। राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा ने पायलट को अपने पाले में साधने की कोशिश की थी लेकिन तब भी बात नहीं बन पाई थी। पायलट अपने समर्थकों की ठीक-ठाक संख्या बल नहीं जुटा पाए थे।

लेकिन, अब भाजपा कांग्रेस में फूट डालने में कामयाब होती दिख रही है। सचिन पायलट ने सीएम गहलोत के खिलाफ बगावत कर दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि गहलोत को राजस्थान सरकार से बेदखल करने का भाजपा का पायलट प्रोजेक्ट कितना सफल होता है।

11 मार्च को सिंधिया भाजपा में हुए थे शामिल

11 मार्च को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा ज्वॉइन किया था। उनके बगावत के बाद कांग्रेस के 22 विधायकों ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया था और कमलनाथ की सरकार मध्य प्रदेश में अल्पमत में आ गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और बहुमत परीक्षण से पहले ही सीएम कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया था। इस तरह प्रदेश में भाजपा की फिर से सरकार बनी थी। भाजपा ने सिंधिया को अपने कोटे से राज्यसभा भेज दिया।अब राजस्थान के पूरे घटनाक्रम को भी मध्य प्रदेश से जोड़कर देखा जा रहा है।