बिहार में बीजेपी करेगी आधा दर्जन सांसद कुर्बान, बगावत रोकने को बनाया ये प्लान

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बिहार में एनडीए के बीच सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला तय होते ही भाजपा सांसदों में बेचैनी है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस फॉर्मूले के तहत यह तय हो गया है कि भाजपा के मौजूदा सांसदों में से आधा दर्जन पैदल हो सकते हैं. जबकि चुनाव लड़ने वालों में भी कम से कम दर्जनभर को टिकट नहीं मिलेगा.

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दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 30 सीटों पर लड़ी थी. उसे 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. अबकि बार जदयू-भाजपा के बीच बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान हो चुका है. ऐसे में यह संभावना है कि दोनों दल 16 या अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. इस लिहाज से देखें तो मौजूदा कुछ सांसद का टिकट कटना तय है.

भाजपा के अभी इन सीटों पर सांसद हैंपाटलिपुत्र, पटना साहिब, आरा, औरंगाबाद, बेगूसराय, बक्सर, दरभंगा, गया, गोपालगंज, झंझारपुर, मधुबनी, महाराजगंज, मुजफ्फरपुर, नवादा, पश्चिम चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, सारण, सासाराम, शिवहर, सीवान, उजियारपुर व वाल्मीकिनगर. ऐसे में उन लोकसभा क्षेत्र के भाजपा नेताओं में अधिक बेचैनी बढ़ी हुई है, जो जदयू के गढ़ माने जाते रहे हैं. माना जा रहा है कि अपनी परम्परागत सीटों पर जदयू दावा कर सकता है.

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राजनीतिक गलियारे में चल रही चर्चाओं के अनुसार बे-टिकट करने के लिए भाजपा कुछ फॉर्मूला पर काम करेगी. मौजूदा सांसदों में से कुछ को पार्टी ने पहले से ही किनारा करने का मन बना लिया है. इसमें दो ऐसे नेता हैं जो पहले से पार्टी विरोधी तेवर अपनाए हुए हैं. चर्चा में एडजस्टमेंट की भी बात सामने आ रही है. जीत सुनिश्चित करने के लिए एनडीए इस रणनीति पर काम कर रहा है कि जिस प्रत्याशी की जीत की संभावना अधिक है, उन्हें ही टिकट दिया जाए.

मतलब अगर संभावित जिताऊ उम्मीदवार किसी एक दल में हैं और सीट किसी दूसरे दल को मिला है तो उम्मीदवार के साथ ही संबंधित दल को लोकसभा सीट दे दी जाएगी. अर्थात जदयू-भाजपा आपस में प्रत्याशियों की अदला-बदली भी कर सकते हैं. इससे बे-टिकट होने के बाद असंतुष्टों की संख्या कम की जा सकेगी. वहीं कुछ बे-टिकट होने वालों को पार्टी राज्यसभा या अन्य जिम्मेवारी देकर भी शांत करने की कोशिश की जा सकती है.

 

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