राजनीति

बिहार में जदयू-भाजपा के लिए बुरी खबर, इन दो सीटों पर महागठबंधन हुआ मज़बूत

लोकसभा चुनाव में अब बहुत कम समय बचा है. ऐसा माना जा रहा है कि मार्च के पहले हफ़्ते में चुनाव की घोषणा हो जाएगी. अब जबकि चुनाव को बहुत कम समय बचा है तो हम इस चर्चा को तेज़ कर रहे हैं और लोकसभा चुनाव विशेष की इस श्रंखला को आगे बढ़ा रहे हैं. आज हम बिहार की 40 लोकसभा सीटों में से दो लोकसभा सीटों की बात करने जा रहे हैं. सबसे पहले हम जिस सीट की बात करने जा रहे हैं वो सारण लोकसभा सीट.

सारण लोकसभा सीट में 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. फ़िलहाल यहाँ से भाजपा के क़द्दावर नेता राजीव प्रताप रूडी सांसद हैं. 2014 की ‘मोदी लहर’ में चुन कर आये रूडी ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को हराया था. राबड़ी और रूडी के बीच मुक़ाबला काँटे का ही था. 40 हज़ार से कुछ अधिक मतों से रूडी जीतने में कामयाब रहे.रूडी को 3,55,120 वोट हासिल हुए थे जबकि राबड़ी देवी को 3,14,172 वोट मिले. तीसरे स्थान पर जदयू के सलीम परवेज़ रहे. उन्हें एक लाख से कुछ अधिक वोट मिले. यहाँ बसपा ने भी अपना प्रत्याशी खड़ा किया था. बसपा प्रत्याशी बाल मुकुंद चौहान को 15,500 वोट हासिल हुए थे.

इस सीट के इतिहास की बात करें तो पहले ये सीट छपरा लोकसभा सीट के नाम से जानी जाती थी. 2008 के परिसीमन के बाद सारण सीट अस्तित्व में आयी. 2009 में यहाँ से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने चुनाव जीता था. ये सीट लालू यादव परिवार का गढ़ मानी जाती है.इसके पहले जब ये छपरा सीट हुआ करती थी तब भी यहाँ से लालू चुनाव जीते थे जबकि रूडी भी यहाँ चुनाव जीतते रहे हैं. कुल मिलकर ये माना जा सकता है कि यहाँ से लालू परिवार और रूडी का मुक़ाबला रहता है जिसमें कभी कोई तो कभी कोई जीतता है.

इस बार के समीकरण की बात करें तो जदयू और भाजपा मिलकर चुनाव लड़ने वाले हैं. जानकार मानते हैं कि इसके बावजूद भी स्थिति राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन की मज़बूत है. भाजपा और जदयू इस बारे में रणनीति बना रहे हैं कि वो किस तरह से राजद का सामना करें. भाजपा और जदयू की सरकार के प्रति लोगों में अब बहुत उत्साह देखने को नहीं मिलता.

ये तो हो गई सारण सीट की बात, आइये अब बात करते हैं एक और लोकसभा सीट की, ये सीट है महाराजगंज लोकसभा सीट.

महाराजगंज लोकसभा सीट में 6 विधानसभा सीटें हैं जिनमें से 4 सारण ज़िले में पड़ती हैं. यहाँ से अभी भाजपा के जनार्दन सिंह सिग्रीवाल सांसद हैं. उन्हें 2014 में ‘मोदी लहर’ का फ़ायदा मिला था. 2013 में यहाँ उपचुनाव हुए थे जिसमें राजद नेता प्रभुनाथ सिंह विजयी हुए थे. 2009 में ये सीट राजद के ही पास थी. तब उमा शंकर सिंह ने यहाँ से जीत हासिल की थी. 2014 की बात करें तो यहाँ जनार्दन सिंह और प्रभुनाथ सिंह के बीच काफ़ी क़रीबी मुक़ाबला था. प्रभुनाथ पहले जदयू के टिकट पर यहाँ से चुनाव जीत चुके थे इसलिए उनकी पकड़ इस सीट पर थी. हालाँकि अंत में वो 2014 में चुनाव हार गए. इस सीट से पूर्व प्रधानमन्त्री चंद्रशेखर भी सांसद रहे हैं.साल 2019 की बात करें तो यहाँ से एक बार फिर कड़ा मुक़ाबला होने की उम्मीद है. ऐसी उम्मीद की जा रही है कि यहाँ से जदयू-भाजपा गठबंधन की ओर से जदयू का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा.

Back to top button