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बकरी बचाने को बाघ से लड़ गई ये लड़की, उसके बाद खूब ली सेल्फी, पढ़ें ये सच्ची कहानी

आज हम आपको एक ऐसी खबर से रूबरू करवाने वाले है, जिसके बारे में जान कर आप हैरान रह जायेंगे. खबर एक इक्कीस साल की लड़की के बारे में है जिसका नाम रुपाली मेश्राम है और जो दिखने में काफी दुबली पतली है. साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली इस लड़की के सर और पैर तथा कमर पर काफी घाव आये थे. जिसके चलते इसे टांके लगाए गए.

दरअसल रुपाली पर बाघ ने हमला किया था. हालांकि ये मामला इतना सीधा नहीं है, जितना लगता है. जी हां रुपाली और उसकी माँ दोनों ने मिल कर इस जंगली बाघ का सामना किया और वापिस गांव लौटने की हिम्मत दिखाई. गौरतलब है कि पूर्वी विदर्भ में भंडारा जिले के नागझिरा इलाके में वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी से स्टे गांव में ही रुपाली का छोटा सा घर है. बता दे कि उसका बड़ा भाई और माँ वन विभाग के लिए दिहाड़ी मजदूरी करते है. इसके साथ ही परिवार में कुछ बकरियां भी पाल रखी है, ताकि कुछ पैसे कमा सके. ऐसे में जब एक रात बकरियों के चिल्लाने की आवाज आई तो रुपाली ने घर का दरवाजा खोल दिया.

रुपाली ने हल्की रौशनी में बाघ की छाया देखी और सभी बकरियां भी खून से लथपथ थी. ऐसे में जब रुपाली ने लकड़ी से बाघ पर हमला किया तो बाघ ने भी उस पर वार कर दिया. हालांकि बाघ के पंजे से उसके सर से खून बहने लगा था, लेकिन फिर भी उसने लकड़ी को नहीं छोड़ा और चिल्ला कर अपनी माँ को बुलाया. वही रुपाली की माँ का कहना है कि उसकी हालत देख कर उन्हें ऐसा लग रहा था कि अब वो बच नहीं पाएगी. ऐसे में रुपाली की माँ ने भी दो बार बाघ पर वार किया और बाघ ने उनकी दाहिनी आंख के पास पंजे से वार किया. हालांकि वो जैसे तैसे करके रुपाली को घर के अंदर ले आई और दरवाजा बंद कर दिया.

छोटी बस्ती होने के कारण सब के घर दूर दूर थे. जिसके चलते उनकी चीखे किसी को सुनाई नहीं दी. मगर तभी रुपाली ने कुछ ऐसा किया, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. जी हां इस दौरान उसने मोबाइल फोन निकाल कर अपनी और अपनी माँ की कुछ सेल्फियां ली. इस बारे में रुपाली का कहना है कि बाघ घर के बाहर था और उनके बचने की भी कोई उम्मीद नहीं थी. इसलिए वो इस हादसे को रिकॉर्ड करके रखना चाहती थी और ऐसे में उसकी माँ ने मदद के लिए कुछ लोगो को फोन करने के लिए भी कहा. जिनमे से एक फोन वनकर्मी को लग गया और वो आधे घंटे बाद वहां पहुँच गया.

इसके बाद वो दोनों भी बाहर आ गए, लेकिन तब तक बाघ जा चुका था. इसी दौरान तुरंत गांव के डॉक्टर की सलाह लेकर एम्बुलेंस को बुलाया गया और उनके घाव पर टाँके लगाए गए. इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल भेज दिया गया और फिर उन्हें नागपुर के सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया गया. फिर यहाँ एक्स रे और सोनोग्राफी जैसे कई टेस्ट हुए. फिर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया.

इस घटना से रुपाली और उसकी माँ ने बहादुरी का परिचय दिया है. हालांकि इस बीच इन्हे काफी आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ा. रुपाली का कहना है कि इस इलाके के पूर्व सांसद ने उनकी मदद करने की बात कही है. उनका कहना है कि इस लड़की को वन विभाग में ही स्थाई नौकरी मिल जाए तो उन्हें ख़ुशी होगी.

बहरहाल हम तो यही कहेगे कि इस मुश्किल घड़ी में जो हिम्मत रुपाली ने दिखाई है, हर इंसान को अपने मन के डर पर काबू पाकर ऐसी हिम्मत जरूर दिखानी चाहिए.

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