बंगाल में बीजेपी को 3-0 से हराकर भी ममता परेशान, जानिए वजह

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देश में हर महीने-दो महीने में किसी न किसी क्षेत्र में कोई न कोई चुनाव या उप चुनाव होते रहते हैं. भले ही ये छोटे-मोटे चुनाव देश की राष्ट्रीय राजनीति में अधिक प्रभाव न डालते हों, परंतु कुछ चुनाव के परिणाम ऐसे होते हैं, जो राज्य की सत्ता में बैठे लोगों की नींद उड़ा देते हैं. शुक्रवार को भी देश में दो राज्यों उत्तराखंड (1) और पश्चिम बंगाल (3) की 4 विधानसभा सीटों के उप चुनाव परिणाम घोषित हुए. राष्ट्रीय राजनीति में भले ही इनकी चर्चा अधिक न हुई हो, परंतु स्थानीय स्तर पर इन चुनाव परिणामों ने विशेषकर पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रभाव डाला है.

वास्तव में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP-बीजेपी) के बढ़ते कद से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC), उसकी सुप्रीमो व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार परेशान हैं. लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने ममता के गढ़ पश्चिम बंगाल में भारी सेंध लगा कर 18 सीटें जीत लीं, तो ममता को अपनी राजनीतिक ज़मीन खिसकती दिखाई देने लगी. इतना ही नहीं, ममता ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के लिए लोकसभा चुनावों में भाजपा के सेंध लगाने के बाद से ही तैयारियाँ शुरू कर दी हैं, परंतु ममता की तैयारियों का बहुत अधिक प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा. ऐसा इसलिए कहा जा सकता है, क्योंकि राज्य की 3 विधानसभा सीटों के उप चुनाव परिणाम कुछ यही संकेत दे रहे हैं.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि पश्चिम बंगाल में हुए उप चुनावों में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने तीनों सीटें जीत लीं. कालियागंज, करीमपुर और खड़गपुर सदर विधानसभा सीटों के उप चुनावों में टीएमसी को ही विजय हासिल हुई है और दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव में तेजी से आगे बढ़ने वाली भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, परंतु हार के बावजूद भाजपा छावनी में निराशा नहीं, अपितु संतोष का वातावरण है, क्योंकि इन परिणामों में भी भाजपा की लोकसभा चुनाव 2019 में आरंभ हुई ‘बंगाल क्रांति’ की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली है.

उप चुनाव परिणामों के आँकड़ों का विश्लेषण करें, तो स्पष्ट है कि भाजपा की बंगाल क्रांति जारी है और तीनों सीटें जीतने के बावज़ूद ममता बैनर्जी न तो इतनी अधिक खुश होंगी और न ही इस बात को लेकर आश्वस्त होंगी कि उनका बंगाली दुर्ग अब भी उतना ही सुरक्षित है. चुनाव परिणामों के आँकड़ों का विश्लेषण करें, तो भाजपा भले ही तीनों सीटें हार गई, परंतु विधानसभा चुनाव 2016 की तुलना में भाजपा को तीन गुना अधिक वोट मिले हैं. इतना ही नहीं भाजपा तीनों सीटों पर दूसरे नंबर पर रही है.