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प्रीति जिंटा की चाहत.. देश में सट्टेबाजी की जाए लीगल..दी ये कमाऊ दलील..!

लंबे अरसे से फिल्मी पर्दे से दूर चल रहीं बबली गर्ल कमबैक को तैयार हैं। जी, हम प्रीति जिंटा की ही बात कर रहे हैं। अब वो जल्द ही फिल्म भैयाजी सुपरहिट से कमबैक करेंगी। उन्होंने 2008 में फिल्मों से ब्रेक लिया था। इस दौरान उन्होंने आईपीएल के बिजनेस को समझने के लिए निगोशिएशन एंड डील मेकिंग एंड चेंज द गेम का कोर्स हावर्ड बिजनेस स्कूल से किया।

बात आईपीएल की हो रही है तो बता दें कि ये लीद बेटिंग याने सट्टेबाजी को लेकर बहुत सुर्खियों में रही है। कानूनन ये जुर्म है लेकिन इस पर प्रीति जिंटा की राय जरा अलग है। उन्होंने कहा-लोगों को सुनने में अटपटा लगेगा, लेकिन इसे लीगलाइज कर देना चाहिए। इससे मैच फिक्सिंग जैसे साइड इफेक्ट अपने आप खत्म हो जाएंगे। बीसीसीआई की गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में खिलाड़ियों या संबंधित लोगों का रैंडम लाई डिटेक्टर टेस्ट करवा लिया जाए। जैसे रैंडम ड्रग टेस्ट होता है। अचानक किसी खिलाड़ी को उठाकर उसका टेस्ट करवा लिया जाता है और झूठ पकड़ा जाता है। इस टेस्ट के डर से लोग गलत काम करने से हिचकिचाएंगे। इसकी बहुत जरूरत है। क्योंकि मैच फिक्सिंग के कारनामे उजागर होने से पूरी टीम फ्रेंचाइजी को नुकसान पहुंचता है।

बकौल प्रीति,  यह अच्छा होगा कि सरकार बेटिंग को लीगलाइज कर दे। इससे सरकारी खजाने को मोटा रेवेन्यू मिलेगा। जिसका इस्तेमाल जन कल्याण की सरकारी योजनाओं से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में हो सकेगा। बेटिंग लीगलाइज न होने के चलते पैसा हवाला, इलीगल आर्म्स और ड्रग्स के कारोबार में जाता है।

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