‘प्याज पर मत करिए कोई बात, क्या देशद्रोही बनकर जाना है पाकिस्तान’

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देखिए, आप प्याज के भाव बढ़ने पर ज्यादा हल्ला मत मचाइये, प्याज चाहे 70 रुपए किलो हो या 100 रुपये अब राष्ट्रवादी दल सत्ता में है 303 सीट जीतकर आया है अब वह जो करे वह ठीक हैं………….. मित्र दीपक कुमार लिखते हैं कि ‘वैसे भी इस देश की तासीर तो प्याज नहीं खाने की रही है. ब्राह्मण और जैन के साथ देश का एक बड़ा तबका प्याज नहीं खाता है.

अगर ज़्यादा चु-चापड़ करेंगे तो सनातन धर्म के वेद शास्त्रों का हवाला देकर प्याज से जुड़ी यह कहानी भी सुना देंगे कि समुद्र मंथन के दौरान जब समुद्र से अमृत का कलश निकला था, तब विष्णु भगवान सभी देवताओं को अमर होने के लिए अमृत बांट रहे थे, तो उसी दौरान राहु-केतु नाम के दो राक्षस भी उनके बीच आकर बैठ गये थे. ऐसे में गलती से भगवान ने उन्हें भी अमृत पिला दिया था, लेकिन जैसे ही देवताओं को यह पता चला तो विष्णु भगवान ने अपने सुदर्शन चक्र से उन दोनों का काम तमाम कर दिया.

बात यहीं तक नहीं है. सिर, धर से अलग होने तक उनके मुंह के अंदर अमृत की कुछ बूंदें चली गईं, ऐसे में राक्षसों का सिर तो अमर हो गया, लेकिन बाकि सब नष्ट हो गया. जब विष्णु जी ने उन पर प्रहार किया तो कुछ खून की बूंदें नीचे गिर गई थीं, ऐसे में उन्हीं खून से प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई, जिस वजह से इन्हें खाने से मुंह से गंध आती है. वगैरह….वगैरह. अब आप सोचिए, यहां सच्चा हिंदू बनकर रहना है या देशद्रोही बनकर पाकिस्तान जाना है.

अब आप उस दौर को एकदम भूल जाएं जब यूपीए-2 के वक़्त प्याज 50 पर थी. तब एक औरत थीं जो रास्ते मे सब्जी की माला पहने सिलेंडर लेकर बैठती थीं!… वैसे कहां हैं वह भद्र महिला, …….. आजकल, क्या कर रही हैं?

ये लेख वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मालवीय के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।