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पूरे शो में मुखौटा पहनकर बनाई अपनी पहचान, इन्होंने निभाया रामायण में जामवंत का किरदार

इन दिनों देश लॉकडाउन में है और दूरदर्शन पर रामायण सीरियल का प्रसारण हो रहा है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर रामायण की खूब चर्चा भी हो रही है। ऐसे में आज हम आपको उस कलाकार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने ‘रामायण’ में जामवंत का किरदार अदा किया था। वह अब कहां है और किस हाल में है, आइए बताते हैं।

रामानंद सागर की ‘रामायण’ में जामवंत का किरदार निभाया था ऐक्टर श्रीकांत राजशेखर उपाध्याय ने, जोकि उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के सुरियावां कस्बे के हरिहरपुर गांव के रहने वाले हैं। राजशेखर उपाध्याय जामवंत के किरदार से खूब मशहूर हो गए थे। जामवंत के रोल में उनका चेहरा ‘रामायण’ में नजर नहीं आया था, बावजूद इसके अपनी दमदार आवाज के बलबूते उन्होंने खूब प्रसिद्धि पाई।

बताया जाता है कि एक वक्त पर लोग राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल से ज्यादा ‘जामवंत’ राजशेखर उपाध्याय के दीवाने हो गए थे। वह जहां भी जाते थे लोग यह कहकर भीड़ लगा लेते थे कि जबतक जामवंत जी के दर्शन नहीं हो जाएंगे, वे वहां से कहीं नहीं जाएंगे।

राजशेखर उपाध्याय को ऐक्टिंग का चस्का स्कूल के वक्त से ही लगा था। इसके बाद यह चस्का धीरे-धीरे बढ़ता गया। पढ़ाई के लिए जब वह बनारस आए, तो वहां भी राम लीला के मंचन में हिस्सा लेने लगे। ऐक्टिंग का शौक था तो वह खुद भी नाटकों में हिस्सा लिया करते थे और उनका निर्माण भी करते थे। ऐसे ही एक नाटक के दौरान उन पर रामानंद सागर के बेटे आनंद सागर की नजर पड़ी और उन्हें ‘विक्रम और बेताल’ में साइन कर लिया गया।

इसके बाद राजशेखर उपाध्याय का करियर चल निकला। ‘विक्रम और बेताल’ में दमदार ऐक्टिंग के बलबूते ही उन्हें ‘रामायण’ में काम मिला। रामानंद सागर ने उन्हें जामवंत का रोल दिया। रिपोर्ट्स के मुताबकि, राजशेखर उपाध्याय की ख्वाहिश विभीषण का रोल करने की थी। लेकिन रामानंद सागर ने उन्हें जामवंत के किरदार के लिए मनाया।

दिलचस्प है कि मुखौटे के पीछे रहते हुए भी राजशेखर उपाध्याय ने अपनी दमदार आवाज के दम पर लोकप्रियता बटोरी। रामायण के बाद राजशेखर ने कई टीवी शोज और फिल्मों में काम किया। उन्होंने ‘जय हनुमान’, ‘महाभारत’ और ‘अदालत’ जैसे टीवी शोज के अलावा राजशेखर कुछेक फिल्में भी कीं।

आजकल राजशेखर अपने गांव में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह राम कथा के प्रचार-प्रसार में लगे हैं। जहां से भी उन्हें राम कथा आयोजन का बुलावा आता है, वह वहां जाते हैं और बड़े ही चाव से कथा सुनाते हैं।

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