निर्जला एकादशी : इस दिन भूलकर भी न करें ये काम, विष्णु जी हो जाएंगे बेहद नाराज !

0
84

निर्जला एकादशी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी के नाम से जाना जाता है। आज निर्जला एकादशी है। इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन निर्जला व्रत रखने और विधिवत पूजा करने का विधान है। वैसे तो सालभर में कई एकादशी पड़ती है लेकिन इस दिन का खास महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान जरूर श्रद्धालुओं की इच्छा पूरी करते हैं।

वैसे तो सालभर में 24 एकादशी पड़ती है। वहीं महीने में दो एकादशी होती है। कृष्ण पक्ष की एकादशी और दूसरे पक्ष की एकादशी। जिनका खास महत्व होता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती है। जिसका अर्थ है कि बिना पानी पिए व्रत करना। कहा तो यह भी जाता है कि जो शख्स पूरे साल एकादशी का व्रत नहीं रख पाता लेकिन इस व्रत को लेकर ले तो बाकि एकादशियों का लाभ मिलता है। इसे करने से पुण्य का फल प्राप्त होता है। इस खास मौके पर श्रद्धालुओं को व्रत करने के साथ साथ कुछ उपाय अवश्य करने चाहिए ताकि उनकी मनोवांछित फल मिल सके।

निर्जला एकादशी व्रत नियम व उपाय
1. निर्जला एकादशी पर कभी भी दातुन से दांत साफ नहीं करना चाहिए। इसके पीछे मान्यता यह है कि एकादशी वाले दिन किसी पेड़ की टहनियों को तोड़ने से भगवान विष्णु नाराज हो जाते हैं। साथ ही इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करना चाहिए।
2. निर्जला एकादशी के दिन फल फूल आदि भी नहीं खाने चाहिए। इस दिन जल भी ग्रहण करने की मनाही होती है। साथ ही आलस्य करना वर्जित माना जाता है।
3. निर्जला एकादशी को एक ही समय भोजन करना चाहिए। व्रत शाम में पूजा करने के बाद खोले। याद रहे कि रात में फर्श में नहीं सोना चाहिए।
4. निर्जला एकादशी में चावल खाने की मनाही होती है। इसके जगह तिल व मिश्री का प्रयोग किया जा सकता है।
5. निर्जला एकादशी के दिन शाम में व्रत खोलने से पहले भगवान विष्णु को भोग में तुलसी पत्ते के का इस्तेमाल करें।