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निकट है जंग: तीनों सेनाओं से बोले CDS रावत- वॉर के लिए रहो रेडी, लद्दाख में बढ़ाओ फोर्स!

लद्दाख में चीन बुरी तरह से पिट चुका है. इसके बाद भी वह घटिया हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. भारत के खिलाफ युद्ध की धमकी देता घूम रहा है. इसके पीछे कई वजह हैं. लेकिन सबसे बड़ी वजह है कि लद्दाख में चीन भारत के हाथों तगड़ी शिकस्त खा चुका है और इस सच्चाई को पूरी दुनिया जान चुकी है. ऐसे में उन देशों पर चीन की पकड़ कमजोर हुई है, जिन पर वह अपना अधिकार जताता आ रहा है. इसमें ताइवान भी शामिल है. अब ताइवान ने साफ कह दिया है कि अगर चीन उसकी ओर आंख उठाकर देखेगा तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. चीन की पोल खुल चुकी है तो वह घबराया हुआ है, यही वजह है कि युद्ध की गीदड़ भभकी दे रहा है, उसे लग रहा है कि ऐसा करने से उसके सताए गए ताइवान जैसे देश डर जाएंगे और फिर से उसकी दासता स्वीकार कर लेंगे. लेकिन भारत अब चीन को कोई भी मौका नहीं देना चाहता.

लिहाजा चीन के खिलाफ हर कदम उठाने के लिए हिन्दुस्तान तैयार हो रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से लद्दाख बॉर्डर पर तैनात सैनिकों के लिए दीया जलाने की अपील की है तो वहीं, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत ने तीनों सेनाओं को सैनिकों की तैनाती करने के साथ-साथ किसी भी विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहने को कहा है. रावत ने कहा है कि युद्ध के सेना तैयार रहे.

शीर्ष सैन्य कमांडरों के अनुसार, जनरल रावत ने तीनों सेवाओं के लिए यह स्पष्ट कर दिया है कि लद्दाख में 1597 किलोमीटर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ तैनात सैनिकों, तोपखाने और टैंकों के साथ सामान्य समय नहीं हैं. उन्होंने कहा, “पूर्वी लद्दाख में स्थिति किसी भी समय बदतर हो सकती है. सशस्त्र बलों को किसी भी परिदृश्य के लिए तैयार रहना चाहिए. ऐसा नहीं हो सकता है कि एक तरफ पूरी उत्तरी सेना कमान और पश्चिमी वायु कमान बर्फ में तैनात है, हममें से बाकी लोग त्योहार मना रहे हैं और गोल्फ खेल रहे हैं. किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि लद्दाख में युद्ध चल रहा है.”

भारतीय नौसेना को अफ्रीका के तट से दूर पीएलए नौसेना की तैनाती के बारे में चिंतित होने के बजाय हिंद महासागर में चीनी युद्धपोत गतिविधि की निगरानी करने के लिए अंडमान और निकोबार द्वीप पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया है. लक्षद्वीप और एएनसी के भारतीय द्वीप क्षेत्र राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा की कुंजी हैं क्योंकि वे फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक- दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग लेन पर हावी हैं. अब भारत चीन को कोई भी ऐसा मौका नहीं देना चाहता है जिससे वह फिर से दगाबाजी करे.

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